25 दिन-25 कहानियां: एक क्लिक करब तोहरे हज्जाम के खाते में रुपिया पहुंच जाई, पढ़ें दिलचस्प किस्सा
Varanasi News: आईएमएस बीएचयू के सेवानिवृत्त सेक्शन ऑफिसर कैलाशनाथ पांडेय बताते हैं कि साल 2000 में नरिया-लंका मार्ग की नुकीली सड़कें और बजबजातीं गलियां। सड़क छूने को बेताब बिजली की तारें। लुढ़कते बिजली पोल। उजाले का एक मात्र साधन पेट्रोमैक्स होता था। गंगा में सामनेघाट से रामनगर किले को जोड़ने वाला पीपा पुल था। अब देख लीजिए कि यहां की चमचमाती सड़कें, ब्रिज और कनेक्टिविटी ने तो बड़े महानगरों की तुलना में लाकर खड़ा कर दिया है।
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हमारे नाती-पोते यह बताते हैं कि पहिले के जमाना अब ना रह गईल हव...। एक क्लिक करब तोहरे हज्जाम के मोबाइल में रुपिया पहुंच जाई। चिंता जिन करिए, दाढ़ी-बाल आप बनवाइए। पहले घर में दूध, सब्जी, फल, माला-फूल से लेकर अखबार पहुंचाने वाले हॉकर को महीने में हिसाब करने के लिए नकदी पैसा मजबूरी में रखना पड़ता था लेकिन अब तो बच्चे अपने मोबाइल से ही भेज दे रहे हैं। 25-26 साल पहले हम लोगों ने यह कहां देखा था।
इतना समझ लीजिए कि इन ढाई दशक में काशी ऐसी बदली कि अब अरबों की सौगात भी ऊंट के मुंह में जीरा के समान लगती है। साल 2000 में नरिया-लंका मार्ग की नुकीली सड़कें और बजबजातीं गलियां। सड़क छूने को बेताब बिजली की तारें। लुढ़कते बिजली पोल।
उजाले का एक मात्र साधन पेट्रोमैक्स होता था। गंगा में सामनेघाट से रामनगर किले को जोड़ने वाला पीपा पुल था। बारिश के मौसम में वह जून में ही हटता तो फिर दुर्गा पूजा के आसपास जुड़ता। अब देख लीजिए कि यहां की चमचमाती सड़कें, ब्रिज और कनेक्टिविटी ने तो बड़े महानगरों की तुलना में लाकर खड़ा कर दिया है।
जिस सामनेघाट पुल को बनने में दो सरकारों के 15 साल लग गए वह 2014 के बाद एक झटके में बनकर तन गया। जिलों को आपस में जोड़ने वाले रिंग रोड, चिकित्सा व्यवस्था में इतना बड़ा सुधार तो कभी देखा नहीं गया। कोई सोच भी नहीं सकता था कि कैंसर के उपचार के लिए मुंबई जाने वाले अब काशी में उपचार कराएंगे। बिहार, झारखंड, एमपी और छत्तीसगढ़ समेत पूर्वी यूपी के लोग काशी में उपचार करा रहे हैं। पहले तो किसी तरह जनरल बोगी में फर्श पर बैठकर लोग मुंबई कैंसर के उपचार को जाते थे।
इन बूढ़ी आंखों ने तो 85 बसंत देखे हैं। गंगा की लहरों पर चुनिंदा नावों के हिलोर लेने के साथ ही बनारस की गलियों में बैलगाड़ी से सोना-चांदी ढोए जाने से लेकर अब रोपवे तक भी देख रहा हूं। गंगा में नावों का जाल, इंटरनेशनल क्रूज भी काशीवासी देख पा रहे हैं। सुविधाएं और व्यवस्थाएं बेहतर हुई तो देश के कोने-कोने से लोग काशी में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम और गंगा दर्शन को पहुंच रहे हैं।
महाकुंभ में यह देखा और सुना कि करोड़ों लोग काशी में आए। सामाचार पत्रों और टीवी में यह देखते हुए मालूम चलता है कि पर्यटन में काशी का सबसे ऊंचा स्थान है। होटल, लाज, धर्मशाला, गेस्ट हाउस तो सुने तो लेकिन अब तो होम स्टे जैसी सुविधाएं भी मिल रही है।