UP: 700 म्यूल खाते से 2.50 करोड़ की धोखाधड़ी...तीन साइबर ठग अरेस्ट, एपीके से करते थे खेल; बताया काम का तरीका
Ghazipur News: उत्तर प्रदेश की गाजीपुर पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। म्यूल खाता खोलकर ये लोग करोड़ों की ठगी करते थे। इनके पास से बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड व मोबाईल फोन भी बरामद किया गया है।
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Cyber Crime: देशभर में सैकड़ों म्यूल (फर्जी) खाता खुलवाकर टेलीग्राम पर संचालित कंपनी (क्राउन पे) को बेचकर म्यूल खाता में साइबर फ्रॉड के करोड़ों रुपयों का धोखाधड़ी करने वाले तीन अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। साथ ही भारी मात्रा में बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड व मोबाईल फोन भी बरामद किया है।
करीब विभिन्न प्रदेश में करीब 75 से अधिक एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज मिला, जिसमें करीब 67 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी की शिकायत पंजीकृत मिली है। एसपी डा. ईरज राजा ने बताया कि अपराध एवं अपराधियों के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान के तहत साइबर थाने में पीड़ित मनीष कुशवाहा द्वारा दर्ज प्राथमिकी के मामले में छानबीन चल रही थी।
साइबर सेल थाने की पुलिस टीम ने लंका मैदान के सामने फुल्लनपुर तिराहा से शुक्रवार की रात तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम शादियाबाद थाना के छोटी जंगीपुर निवासी ऋषिराज, जमानिया कोतवाली के बरूइन निवासी रोहन कुमार और सोनभद्र जनपद के करमा थाना के खैरपुर निवासी सचिन सिंह बताया।
पुलिस ने की कार्रवाई
एसपी ने बताया कि गिरफ्तार तीन साइबर अपराधियों के बरामद मोबाइल को चेक किया गया तो पता चला कि देश के विभिन्न प्रदेश में करीब 75 से अधिक एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज होना पाया गया। इन शिकायतों में करीब 67 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी की शिकायत पंजीकृत मिला।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि इनके पास 700 से अधिक म्यूल खाता है। आरोपी सचिन सिंह ने बताया गया कि उसके द्वारा साइबर अपराध से अर्जित लगभग 2.50 करोड़ रुपये अपने दिए गए म्यूल खातों से प्राप्त किया गया है।
आरोपी रोहन ने बताया कि उसके द्वारा साइबर अपराध से अर्जित लगभग 1.75 करोड़ रुपये अपने दिए गए म्यूल खातों से प्राप्त किया गया है। अपराध में दो दर्जन के करीब म्यूल खाता का उपयोग कर साइबर अपराध से अर्जित धनराशि मंगाया गया है। सभी शिकायतों की छानबीन करने के साथ विधिक कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में साइबर मुख्यालय लखनऊ और एमएचए I4 सी को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी।
एपीके फाइल भेजकर कराते हैं इंस्टाल व प्राप्त कर लेते हैं ओटीपी
एसपी डा. ईरज राजा ने बताया कि गैंग में कार्य कर रहे अपराधियों द्वारा टेलीग्राम के माध्यम से खोले गये बैंक खातों की सभी जानकारी इंटरनेट बैंकिंग का यूजर आईडी व पासवर्ड तथा बैंक में रजिस्टर्ड मेल आईडी व रजिस्टर मोबाइल नंबर भेज दिया जाता है। इसके बाद टेलीग्राम के माध्यम से ही एपीके फाइल भेजकर इंस्टाल कराया जाता है, जिससे की रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर प्राप्त सभी प्रकार के ओटीपी व अन्य मैसेज स्वतः प्राप्त हो जाता है।
टेलीग्राम पर संचालित (क्राउन- पे) कंपनी तथा इनके साथ जुड़े साइबर अपराधियो द्वारा जरिये क्रिप्टो ट्रेडिंग व अन्य प्लेटफार्म के जरिये पैसों का लेन देने किया जाता है। इसी प्रकार बेचे गये खाते में प्राप्त पैसों का कमिशन इनके द्वारा क्रिप्टो में ही लिया जाता है। इस प्रकार के अपराध करने वाले प्रत्येक साइबर अपराधियो का क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफार्म पर आईडी होती है।
कोई पॉलिटेक्निक तो कोई डीआरडीओ में कर चुका है काम
एसपी डॉ. ईरज राजा ने बताया कि गिरफ्तार तीन साइबर अपराधियों में कोई पॉलिटेक्निक की पढ़ाई कर चुका है तो कोई डीआरडीओ में कांट्रेट बेसिस पर काम चुका है। एसपी ने बताया कि आरोपी छोटी जंगीपुर निवासी ऋषिराज ने वर्ष 2014 में चंदौली से पालिटेक्निक की पढ़ाई की है। जबकि आरोपी बरूईन निवासी रोहन कुमार वर्ष 2017 में स्नातक की पढ़ाई किया। इसके बाद डीआरडीओ दिल्ली में कांट्रेट बेसिस पर काम कर चुका है। जबकि सोनभद्र का सचिन सिंह बीएससी एग्रीकल्चर ओर एमएससी कर चुका है।
19 सिम कार्ड व एटीएम कार्ड हुआ बरामद
एसपी ने बताया कि तीनों साइबर अपराधियों के पास से 19 सिम कार्ड, 12 एटीएम कार्ड, 05 विभिन्न बैंकों के पासबुक, एक चेक बुक, पांच मोबाइल फोन (जिसकी कीमत लगभग 2 लाख), एक फर्म का मोहर और जीएसटी व एमएसई संबंधित कागजात भी बरामद हुए हैं।