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कोर्ट का फैसला: नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी दोषी, 10 साल की सजा

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Sat, 11 Apr 2026 04:43 PM IST
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सार

14 अक्तूबर 2019 को थाना जंसा में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि अभियुक्त ने वादी की 16 साल की बेटी का शोषण किया। मामला उजागर होने के बाद लड़की को बुलाकर उसे जहर खिला दिया। 

Accused found guilty of abetting suicide of a minor sentenced to 10 years in prison in Varanasi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

फास्ट ट्रैक (द्वितीय) के न्यायाधीश सुनील कुमार की अदालत ने नाबालिग लड़की को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अभियुक्त राजेश्वर कुमार वर्मा को दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कारावास और 20,000 अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। 

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वादी पिता ने 14 अक्तूबर 2019 को थाना जंसा में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि अभियुक्त ने वादी की 16 साल की बेटी का शोषण किया। मामला उजागर होने के बाद 13 अक्तूबर 2019 को लड़की को बहला-फुसलाकर बुलाया और साथ जी नहीं सकते तो साथ मर सकते हैं कहकर उसे जहर खिला दिया। 
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पीड़िता की तबीयत बिगड़ने पर उसे हेरिटेज हॉस्पिटल, मोहनसराय ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। अभियुक्त पक्ष की ओर से पीड़ित परिवार पर प्राथमिकी न करने के लिए दबाव और धमकी देने का भी आरोप लगा। 

विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। मुकदमे के विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से एडीजीसी पवन जायसवाल व वादी के अधिवक्ता ने पैरवी की। कुल 9 गवाह पेश किए गए, जिसके आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी करार दिया।

70 लाख रुपये की धोखाधड़ी व गबन के मामले में आरोपी की जमानत खारिज

सुविधा साड़ी फर्म में 70 लाख रुपये की धोखाधड़ी व गबन के मामले में आरोपी सौरभ गुप्ता को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर जिला जज (षष्ठम) आलोक कुमार की अदालत ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। कज्जाकपुरा आदमपुर निवासी सौरभ गुप्ता फर्म में अकाउंटेंट था। अर्दली बाजार निवासी वादी देवानंद सेवारमानी (सप्पू) ने कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। वादी ने बताया कि 26 जनवरी 2020 से सौरभ गुप्ता को सीए संजय कुमार गुप्ता की सिफारिश पर नियुक्त किया गया था। फर्म में विभिन्न राज्यों से आने वाले साड़ी व्यापारियों के भुगतान की जिम्मेदारी सौरभ के पास थी, जो चेक पर वादी के हस्ताक्षर के बाद विवरण भरकर भुगतान करता था। जांच में सामने आया कि सौरभ गुप्ता ने कथित रूप से कानपुर के ग्रीन सैल्यूशन, स्काई लाइन वेव सैल्यूशन और स्प्रिंट एशिया नामक फर्जी फर्मों के खातों में 70 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए, जबकि वादी का इन फर्मों से कोई व्यावसायिक संबंध नहीं था। बैंक स्टेटमेंट की जांच के बाद मामले का खुलासा हुआ। पूछताछ के दौरान सौरभ गुप्ता टालमटोल करने लगा और बाद में मोबाइल बंद कर भाग गया। वादी ने आरोप लगाया कि इस पूरे षड्यंत्र में सौरभ गुप्ता, उसके पिता राजेश गुप्ता और सीए संजय गुप्ता की मिलीभगत है।  
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