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एम्स का सर्वे: 71 प्रतिशत नौनिहाल बिना बलगम, 61 फीसदी बलगम वाली खांसी से हैं परेशान; पढ़ें पूरी रिपोर्ट

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 03 Apr 2026 12:22 PM IST
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सार

Varanasi News: एम्स भोपाल की टीम ने एक साल तक अध्ययन किया है। सोनभद्र के 513 और वाराणसी के 584 लोगों के लिए सैंपल थे। सोनांचल में फ्लाई ऐश से नौनिहालों को अस्थमा बिना बलगम वाली खांसी की चपेट में 71 प्रतिशत है।

AIIMS Survey 71percentage of Young Children Suffer from Dry Cough, 61 percentage from Cough Phlegm
एम्स का सर्वे। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिजली परियोजनाओं से निकलने वाली फ्लाई ऐश (कोयला जलाए जाने के बाद निकलने वाली राख) परियोजनाओं के आसपास रहने वालों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। एम्स भोपाल की ओर से कराए गए वैज्ञानिक अध्ययन में सिर्फ बड़े-बुजुर्गों पर ही नहीं, नौनिहालों पर भी वायु-जल प्रदूषण गहरा असर डाल रहा है। कम उम्र में ही स्कूल जाने वाले बच्चे अस्थमा से पीड़ित मिल रहे हैं। 71 प्रतिशत नाैनिहाल बिना बलगम वाली खांसी की चपेट में हैं।

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परीक्षण के दायरे में आए ज्यादातर लोगों में खांसी, अस्थमा, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस के लक्षण पाए गए। करीब एक साल तक चले अध्ययन के बाद दावा किया गया है कि वाराणसी के मुकाबले सोनभद्र के हालात बेहद संवेदनशील है। एम्स भोपाल के प्रोफेसर डॉ. राजकुमार पाटिल की अगुवाई में फरवरी 2025 से फरवरी 2026 तक अध्ययन किया गया। 
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सोनभद्र में बिजली परियोजनाओं के 10 किमी के परिक्षेत्र में रह रहे 513 लोगों और यहां से 100 किमी दूर वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे 584 व्यक्तियों के सैंपल सर्वे में उनको शामिल किया गया जो संबंधित क्षेत्र में कम से कम एक वर्ष से रह रहें और उनकी उम्र एक वर्ष से अधिक हो। सभी की अस्थमा, क्रानिक ब्रोंकाइटिस और स्ट्रोक की स्क्रीनिंग की गई। 

कुछ ऐसी मिली वाराणसी-सोनभद्र में स्वास्थ्य की स्थिति

  • 12 महीने तक चले अध्ययन में बच्चों में बिना बलगम वाली खांसी (सूखी खांसी) सबसे आम लक्षण (71 प्रतिशत) के रूप में सामने आई। अन्य आम लक्षणों में बुखार (59.6 प्रतिशत), बलगम वाली खांसी (61.6 प्रतिशत), नाक बहना (58.2 प्रतिशत), और आंखों में जलन (23.2 प्रतिशत) शामिल थे। वहीं वाराणसी में सबसे आम लक्षण बिना बलगम वाली खांसी (37.8 प्रतिशत) था। उसके बाद नाक बहना (29.9 प्रतिशत), बुखार (23.6 प्रतिशत) और दस्त (20.5 प्रतिशत) था। वाराणसी के किसी भी बच्चे में खून वाली खांसी, आंखों में जलन, आंखों में खुजली, आंखों से पानी आना, मसूड़ों में सूजन और त्वचा संबंधी समस्याएं नहीं पाई गईं। 
  • व्यस्कों के मामले में सोनभद्र में सबसे आम (75.5 प्रतिशत) स्वास्थ्य समस्या सूखी खांसी थी। अन्य आम लक्षणों में खुजली (34.9 प्रतिशत), आंखों में जलन (31 प्रतिशत), सांस लेने में कभी भी संतोषजनक महसूस न होना (29 प्रतिशत) और गैस्ट्रिक एसिडिटी (44.8 प्रतिशत) शामिल थे। वाराणसी में, बलगम रहित खांसी (45.9 प्रतिशत), बुखार (19.4 प्रतिशत), गैस्ट्रिक एसिडिटी (33.9 प्रतिशत) और बलगम वाली खांसी (44.3 प्रतिशत) आम लक्षण थे।

एम्स की रिपोर्ट में जो भी सुझाव दिए गए हैं, उस पर अमल किया जा रहा है। डीएम की तरफ से सभी संबंधितों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सीएमओ को प्रभावित इलाके में विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित कराने के लिए कहा गया है। - आरके सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी।

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