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UP News: पूर्वांचल में हर 10 में से एक बच्चा गेमिंग की गिरफ्त में, तीन बच्चों ने ही 1.65 करोड़ गंवाए

राहुल दुबे, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Thu, 12 Feb 2026 11:33 AM IST
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सार

Varanasi News: आईआईटी बीएचयू और केजीएमयू की एक स्टडी के मुताबिक, प्रदेश के पांच फीसदी बच्चे गेम एडिक्टेड हैं। वहीं 10 फीसदी प्री एडिक्शन के शिकार हैं। इनमें सबसे ज्यादा केस बनारस, गाजीपुर, मऊ में सामने आए हैं। 
 

Childhood in captivity of mobile One in every 10 children addicted to gaming many losing ₹1.65 crore
mobile - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मोबाइल स्क्रीन पर चल रहा खेल अब बच्चों की जिंदगी से बड़ा होता जा रहा है। आईआईटी बीएचयू और केजीएमयू की हालिया स्टडी के मुताबिक, प्रदेश के लगभग 5 फीसदी बच्चे गेम एडिक्शन की चपेट में हैं। 10 फीसदी प्री गेम एडिक्शन के शिकार हो चुके हैं। सबसे ज्यादा मामले वाराणसी, मऊ, गाजीपुर में सामने आए हैं। पूर्वांचल के हर 10 में से एक बच्चा गेमिंग की गिरफ्त में है। तीन मामलों में ही बच्चों ने 1.65 करोड़ रुपये गंवा दिए। मां-बाप को जमीन बेचकर कर्ज चुकाना पड़ा। बच्चों की तीन से छह महीने तक काउंसिलिंग भी चली।  

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आईआईटी बीएचयू के मनोवैज्ञानिक डॉ. लक्ष्मण बताते हैं कि ज्यादातर अभिभावक गेम एडिक्शन का केस लेकर नहीं आते हैं। उन्हें इस बारे में पता ही नहीं है। अगर बच्चा टीवी ज्यादा देख रहा है। खाना छोड़ दिया है। भरपेट भोजन नहीं कर रहा। पढ़ाई में मन नहीं लग रहा। ब्रश करना छोड़ दिया तो दिक्कत समझ जाना चाहिए। दिनचर्या में भी बदलाव हो जाता है। यह बात पूछताछ में निकलकर आती है कि बच्चा गेम में फंसा हुआ है। वह इसे नशा जैसा मानता है।
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ऑनलाइन गेमिंग का रिवॉर्ड सिस्टम और सोशल कनेक्शन दिमाग में डोपामिन 

मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप चौरसिया ने बताया कि ऑनलाइन गेम की लत लगने और फिर उसके चलते ऑनलाइन जुए में फंसने के कई मामले आ चुके हैं। अभी भी आ रहे हैं। ऑनलाइन गेमिंग का रिवॉर्ड सिस्टम और सोशल कनेक्शन दिमाग में डोपामिन रिलीज करता है। इससे ऑनलाइन गेमिंग खेलने की और इच्छा बढ़ जाती है इसीलिए अगर उन्हें कोई गेम खेलने से मना करता या काफी देर तक अचानक उन्हें गेम से अलग रहना पड़े तो वह चिड़चिड़े और गुस्सैल हो जाते हैं। ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन की वजह से युवाओं में तनाव और काम के प्रति लगाव कम हो जाता है।

केस-1: गेम में गंवा दिए 40 लाख
छित्तूपुर क्षेत्र के एक परिवार का लड़का ऑनलाइन गेम में फंसा। धीरे–धीरे यही आदत ऑनलाइन जुए तक ले गई। घर से कुछ ज्वेलरी और बाहर से कर्ज लेकर सबकुछ जुए में हार गया। बाहर के कर्जदारों का जब पैसा नहीं मिला तो उन्होंने परिवार से संपर्क करना शुरू किया। परिवार ने शहर में ही एक प्लाट बेचकर उसका कर्ज भरा। लड़के की करीब 3 महीने काउंसलिंग चली।

केस-2: ऑनलाइन गेम में फंसा, फिर जुए में हार गया 75 लाख
मऊ का एक लड़का पहले गेम खेलता था, फिर उसने ऑनलाइन गेम खेलना शुरू किया। इसी के साथ उसे गेम के ही जरिये जुए की लत लग गई। पिता सरकारी नौकरी में अच्छे पद पर थे। धीरे–धीरे करीब एक साल में उसने कर्ज लेकर करीब 75 लाख रुपये जुए में गंवा दिए। कर्जदार घर आने लगे तो, मामला खुल कर सामने आया। पिता को प्लाट बेचकर कर्ज चुकाना पड़ा है। 
 
केस-3: 50 लाख गंवाए तब परिवार को पता चला
कुछ दिनों पहले काशी में बिहार के कैमूर से एक केस आया। रईस परिवार से ताल्लुक रखने वाले एक लड़के को ऑनलाइन गेम की ऐसी लत लगी की वह जुआ खेलने लगा। बाहर से कर्ज लेता गया और करीब 50 लाख जुए में हार गया। एक रिश्तेदार के माध्यम से परिवार को इस बात का पता चला तो उसका जुआ छुड़ाया गया। उसके बाद करीब 6 महीने तक उसकी काउंसलिंग हुई।

अभिभावकों के लिए सलाह 

  • मोबाइल का समय तय करें (डिजिटल टाइम-टेबल बनाएं)
  • बच्चे के कमरे में अकेले इंटरनेट एक्सेस न दें।
  • हर दिन 1–2 घंटे आउटडोर एक्टिविटी अनिवार्य करें।
  • अचानक गुस्सा, नींद कम होना, पढ़ाई से दूरी इन संकेत को समझें।
  • बैंक ट्रांजेक्शन और ऑनलाइन पेमेंट पर नजर रखें।
  • समस्या दिखे तो तुरंत मनोचिकित्सक या काउंसलर से मिलें।
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