बीएचयू में सम्मेलन: बचपन के आघात, पारिवारिक विवादों, शोषण से भी बढ़ी सीजर्स की बीमारी; जांच और इलाज पर चर्चा
Varanasi News: बीएचयू में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में कई गंभीर बीमारियों पर चर्चा हुई। इनके इलाज को लेकर भी विमर्श किया गया। चिकित्सकों ने बताया कि एपिलेप्सी में मस्तिष्क में बार-बार दौरे पड़ते हैं। इन दौरों की अवधि सेकंड से लेकर कई मिनट तक हो सकती है।
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आईएमएस बीएचयू में न्यूरो की गंभीर बीमारियों के जांच और इलाज को लेकर शनिवार को दो दिन के राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। केएन उडुप्पा सभागार में न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से कराए गए इस कार्यक्रम में साइकोजेनिक एपिलेप्सी और साइकोजेनिक नॉन-एपिलेप्टिक सीजर्स (पीएनईएस) बीमारी का हल बताया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि बचपन के आघात या पारिवारिक विवाद, स्कूल या सामाजिक जीवन में कठिनाइयां, बुलिंग या व्यक्तिगत संघर्ष और महिलाओं में कभी-कभी शारीरिक या मानसिक शोषण के इतिहास चलते ये बीमारियां बढ़ी हैं। सीजर मस्तिष्क में अचानक होने वाली अनियंत्रित इलेक्ट्रिक एक्टिविटी के चलते ये बीमारी होती है।
व्यक्ति के व्यवहार, शारीरिक गतिविधियों, संवेदनाओं या चेतना में अचानक बदलाव आ सकता है। वहीं, एपिलेप्सी में मस्तिष्क में बार-बार दौरे पड़ते हैं। इन दौरों की अवधि सेकंड से लेकर कई मिनट तक हो सकती है। निदेशक प्रो. एसएन संखवार, डीन प्रो. संजय गुप्ता और न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. वीएन मिश्रा व डॉ. अभिषेक पाठक सहित कई डॉक्टरों की मौजूदगी में ये कार्यक्रम हुआ।
मिलता है गलत इलाज : विशेषज्ञों ने बताया कि ये ऐसे दौरे होते हैं जो देखने में एपिलेप्सी की तरह से लगते हैं लेकिन इनमें मस्तिष्क में असामान्य विद्युत गतिविधि नहीं होती। ये मुख्य तौर पर मनोवैज्ञानिक कारणों से आते हैं। इसकी सही जांच देर से हो पाती है। इससे मरीजों को लंबे समय तक गलत इलाज मिल सकता है। इसका इलाज वीडियो ईईजी जांच से शुरू किया जाता है।
हर एक लाख में तीन से 33 मरीज : एपिलेप्सी सर्जरी के करीब 20 से 30 फीसदी मामले पीएनईएस के होते हैं। अनुमानित दर 1.5 से 3 प्रति लाख प्रति वर्ष है, जबकि सामान्य आबादी में दो से 33 प्रति लाख तक हो सकती है। इसके सबसे ज्यादा मामले महिलाओं में आते हैं। इनकी शुरुआत अक्सर युवावस्था में होती है। कई मामलों में एपिलेप्सी और पीएनईएस दोनों साथ-साथ भी मौजूद हो सकते हैं। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी इसका इलाज बताया गया।
सीजर्स की कई वजहें : एपिलेप्सी, सिर में गंभीर चोट, मस्तिष्क संक्रमण, स्ट्रोक, आनुवंशिक कारण, मेटाबॉलिक असंतुलन (जैसे हाइपोग्लाइसीमिया, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन), ब्रेन ट्यूमर, दवाओं का अचानक बंद होना या नशे का प्रभाव।
