तांबे की खरीदारी में जबरदस्त तेजी: रोज बिक रहा 20 किलो, तीन महीने में 450 रुपये चढ़े तांबे के दाम
Varanasi News: वाराणसी में अब निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के लिए तांबे का रुख किया है। ऐसे में यहां रोज 20 किलो तांबा बिक रहा है। यही वजह है कि तीन महीने में 450 रुपये तांबे के दाम चढ़ गए।
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वाराणसी जिले में सोने और चांदी की कीमतों में आए भारी उछाल के बाद अब निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के लिए तांबे का रुख किया है। काशी के पारंपरिक धातु बाजारों, ठठेरी बाजार और कर्णघंटा में इन दिनों तांबे की सिल्लियों की खरीदारी में जबरदस्त तेजी आई है।
कारोबारियों के अनुसार, बाजार में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 किलो तांबे की सिल्लियों की बिक्री हो रही है।कारोबारी विशाल कसेरा के अनुसार, वर्तमान में एक किलो तांबे की सिल्ली की कीमत 1800 से 2000 रुपये के बीच है, जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अतिरिक्त देय है।
तांबे से बने सामान्य बर्तनों या सामानों की कीमत बाजार में 1300 से 1500 रुपये प्रति किलो है, लेकिन निवेश के लिए लोग सिल्लियों को अधिक पसंद कर रहे हैं क्योंकि इन्हें स्टोर करना और भविष्य में रिसेल करना आसान होता है। निवेशकों का यह रुझान पिछले दो-तीन महीनों से लगातार बना हुआ है। कीमतों में आई तेजी का एक कारण यह भी माना जा रहा है।
गर्मी में हवा भी होगी महंगी
तांबे की बढ़ती कीमतों का सीधा असर इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर पड़ता दिख रहा है। आईआईए के मंडलीय चेयरमैन प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि तांबा महंगा होने से पंखा उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। चूंकि पंखे, कूलर और एसी की मोटर वाइंडिंग में तांबे के तारों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है, इसलिए आगामी गर्मी के सीजन में इन उपकरणों की कीमतों में इजाफा होना तय है। ऐसे में इस बार गर्मियों में ठंडी हवा खाना आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने वाला है।
इन जगहों पर हो रहा तांबे का सबसे अधिक प्रयोग
सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण, बिजली के तार, नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर पैनल और विंड टर्बाइन), पंखे और कूलर, इलेक्ट्रिक वाहन, बर्तन और मूर्तियां आदि।