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UP: 'आपका मोबाइल हैक हो गया है...', कहकर 28.60 लाख रुपये की साइबर ठगी; पुलिस ने दर्ज किया मामला

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 06 Feb 2026 12:56 PM IST
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सार

Varanasi News: वाराणसी में साइबर ठगी को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इस बीच, मिर्जामुराद क्षेत्र में शातिरों ने एक युवक से लगभग 28 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

Cyber fraudsters swindle 28.60 lakh by saying Your mobile phone has been hacked police register case
मिर्जामुराद थाने की पुलिस ने दर्ज किया मामला। - फोटो : FREEPIK
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विस्तार
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Cyber Crime News: मिर्जामुराद क्षेत्र के मेहंदीगंज गांव में एक व्यक्ति के साथ साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। ठगों ने पीड़ित को यह कहकर जाल में फंसाया कि उसका मोबाइल हैक हो गया है, और देखते ही देखते उसके बैंक खाते से 28 लाख 60 हजार रुपये की निकासी कर ली।

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मेहंदीगंज मिर्जामुराद निवासी सराजनाथ सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह बीते शनिवार को अपने घर पर बैठे थे। इसी दौरान एक अनजान नंबर से उनके मोबाइल पर कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को तकनीकी सहायता कर्मी बताते हुए कहा कि उनका मोबाइल हैक हो गया है।
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पीड़ित कुछ समझ पाता, उससे पहले ही उसके मोबाइल पर बैंक से 28.60 लाख रुपये कटने का मेसेज आ गया। यह देखकर उसके होश उड़ गए। घटना के तुरंत बाद पीड़ित ने साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद बृहस्पतिवार को वह मिर्जामुराद थाने पहुंचा और लिखित तहरीर दी। थाना प्रभारी प्रमोद कुमार पांडेय ने बताया कि तहरीर मिल गई है और मामले की जांच की जा रही है।

बीएचयू का डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर बताकर की 22 हजार 500 की ठगी
चितईपुर थाना क्षेत्र के नेवादा स्थित राजेंद्र विहार कॉलोनी निवासी और एक निजी कंपनी में जनरल पद पर कार्यरत अनुज कुमार की तहरीर पर लंका थाने में 22 हजार 500 रुपये की साइबर ठगी में प्राथमिकी दर्ज हुई। अनुज कुमार का आरोप है कि अभिषेक जैन नामक युवक उनसे मिला और खुद को काशी हिंदू विश्वविद्यालय का डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर बताया। उसने बीएचयू में टेंडर से जुड़ी फीस जमा करने के लिए पैसों की कमी बताकर मदद मांगी। 

आरोपी की बातों में आकर अनुज कुमार ने आरोपी के बताए गए व्यक्ति सवर्यदीप दास मजूमदार के बैंक खाते में 22,500 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब पीड़ित ने बीएचयू कार्यालय में जानकारी की, तो पता चला कि इस नाम का कोई अधिकारी वहां कार्यरत नहीं है और न ही कोई ऐसा टेंडर निकला है। थाना प्रभारी राकेश गौतम ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। 

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