UP: नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी...पुलिस वेरिफिकेशन, आधार, पैन व जन्म प्रमाणपत्र बनाते थे; गिरोह के तीन अरेस्ट
आजमगढ़ में पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले अंतरजनपदीय गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी पुलिस वेरिफिकेशन, आधार, पैन और जन्म प्रमाणपत्र तैयार कर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करते थे। पुलिस ने उनके कब्जे से एक कार, 11 मोहरें, फर्जी दस्तावेज, नकदी और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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आजमगढ़ के रानी की सराय पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर 100 से अधिक बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले एक अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य फर्जी पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र और विभिन्न सरकारी कार्यालयों के कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सरकारी और निजी संस्थानों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर मोटी रकम वसूलते थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी दस्तावेज तैयार करने में प्रयुक्त मोहरें, मोबाइल फोन, सरकारी प्रोफार्मा, पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट, कार और नकदी सहित बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि रविवार की रात प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार अपनी टीम के साथ गश्त पर थे। इसी दौरान मोबाइल लोकेशन के आधार पर आजमगढ़-वाराणसी मुख्य मार्ग स्थित कोटिला कट के पास एक ब्रेजा कार के निकट तीन संदिग्धों को पकड़ लिया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान बिहार के मधुबनी जनपद के बासोपट्टी थाना क्षेत्र के सेलीबेली गांव निवासी लालू उर्फ राकेश कुमार, बलिया जनपद के रसड़ा थाना क्षेत्र के डेहरी गांव निवासी दिनेश कुमार गुप्ता और मंदा गांव निवासी धर्मेंद्र गुप्ता के रूप में बताई। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि मामले की शुरुआत 20 मई 2026 को हुई थी, जब रानी की सराय थाना क्षेत्र के अंधौरी गांव निवासी पंकज यादव ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में थाना रानी की सराय में प्राथमिकी दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान इन तीनों आरोपियों के नाम प्रकाश में आए।
जांच में सामने आया कि आरोपी स्वयं को नौकरी दिलाने वाला एजेंट बताकर बेरोजगार युवाओं से संपर्क करते थे। पहले उनका विश्वास जीतते और फिर सरकारी विभागों और निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी रकम वसूल लेते थे। इसके बाद अभ्यर्थियों के नाम पर फर्जी पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र तथा अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार कर उन्हें नौकरी मिलने का भरोसा दिलाते थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, दो सिम, 11 मोहरें, इंकपैड, स्टेपलर, आधार कार्ड, पुलिस वेरिफिकेशन प्रोफार्मा, प्रमाणित पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, आधार व पैन कार्ड की प्रतियां, जन्म प्रमाणपत्र की प्रतियां, नगालैंड के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के प्रोफार्मा, प्रमाणित दस्तावेज, एक लिफाफा, कार, रेलवे पहचान पत्र और 5,360 नकद बरामद किए हैं।
इस मामले में अब तक 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अभी भी इस मामले में 50-50 हजार के मुख्य आरोपी विद्यासागर कोईलारी खुर्द गांव निवासी विद्यासागर व वीरेंद्र यादव की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। जिनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।