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Holi 2026: मथुरा में उड़ेगा काशी का गुलाल, कान्हा के लिए मथुरा भेजे गए अबीर-फूल और खिलौने
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 03:18 PM IST
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सार
Varanasi News: कान्हा के लिए काशी विश्वनाथ धाम से अबीर-फूल के साथ ही वस्त्र और खिलौने भेजे गए। मंदिर न्यास की पुष्पों से सुसज्जित वाहन मथुरा के लिए रवाना हुआ।
कान्हा के लिए मथुरा भेजे गए अबीर-फूल और खिलौने
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लड्डू गोपाल के मथुरा में बाबा विश्वनाथ के नाम का अबीर-गुलाल उड़ेगा। सोमवार को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से फूल, वस्त्र और अबीर-गुलाल जैसे उपहारों को मथुरा के लिए भेजा गया। मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा, डिप्टी कलेक्टर शंभु शरण और मंदिर के शास्त्रियों ने मंदिर न्यास की पुष्पों से सुसज्जित वाहन में सभी सामग्री को रखा।
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शंखनाद और हर-हर महादेव... के जयघोष के बीच सामग्री को प्रस्थान कराया गया। मंगलवार को मथुरा में इन उपहारों की शोभायात्रा निकलेगी। रंगभरी एकादशी और होली पर मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि में विराजमान भगवान श्री लड्डू गोपाल को अर्पित किया जाएगा।
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बाबा विश्वनाथ में विधान से पूजित की गई सामग्री
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सीईओ विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि काशी और मथुरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मीय और आध्यात्मिक धारा से जुड़े हुए हैं। जिस तरह से श्रीकृष्ण जन्मभूमि से हर साल बाबा विश्वनाथ के लिए गुलाल, प्रसाद आदि विश्वनाथ धाम में आता है तो उसी तरह से यहां से भी भेजा जा रहा है।
श्री लड्डू गोपाल के होली शृंगार के लिए विशेष वस्त्राभूषण, सुगंधित पुष्प, अबीर-गुलाल, पूजित प्रसाद, मिष्ठान, चॉकलेट, नवीन वस्त्र, लकड़ी के खिलौने, नवीन वस्त्र और अन्य मांगलिक सामग्री भेजे गए। इन सामग्रियों को बाबा विश्वनाथ के सानिध्य में विधिपूर्वक पूजित किया गया है।
न्यास के अनुसार, रंगभरी एकादशी शिव-शक्ति और राधा-कृष्ण के प्रेम, आनंद और उत्सव का दिन है। यह आयोजन दिखाता है कि सनातन संस्कृति में कई तीर्थों के बीच परस्पर सम्मान, सहभागिता और आध्यात्मिक सहयोग की परंपरा आज भी जीवंत है।
पंचबदन प्रतिमा और बाल गणेश का श्रृंगार और प्रतिष्ठा
रंगभरी एकादशी से चार दिन पहले सोमवार को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में शिव-पार्वती की पंचबदन प्रतिमा और बाल गणेश जी श्रृंगार किया गया। श्री लक्ष्मी नारायण जी के विग्रह के पास बने नव-निर्मित कक्ष में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर इनको प्रतिष्ठित किया गया। अनुष्ठान आचार्यों के मार्गदर्शन में शास्त्रीय परंपरा के साथ इसे पूरा किया गया। प्रतिमा को विधिपूर्वक पुष्पों और रुद्राक्ष की मालाओं से सजाया किया गया। वहां उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर पर दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। इससे पहले बाबा विश्वनाथ का सोमवारीय रुद्राभिषेक किया गया।
