UP News: पेड़ कटने के मामले में बीएचयू, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य सरकार को नोटिस; चार हफ्ते में मांगा जवाब
एनजीटी की प्रधान पीठ ने बीएचयू में अवैध पेड़ कटान मामले में सुनवाई कर बीएचयू, यूपीपीसीबी, राज्य सरकार, डीएम और डीएफओ को नोटिस जारी किया। चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पूर्व आदेश के बावजूद न पेड़ लगाए गए, न क्षतिपूर्ति वसूली हुई।
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली में बुधवार को बीएचयू परिसर में पेड़ काटे जाने के मामले में दो सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की। इसमें याचिकाकर्ता अधिवक्ता सौरभ तिवारी की ओर से दायर निष्पादन याचिका पर सुनवाई हुई। एनजीटी ने बीएचयू, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य सरकार, डीएफओ और डीएम को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी।
एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव एवं विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की दो सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान याचिकाकर्ता सह अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने वर्चुअल माध्यम से एनजीटी के समक्ष बहस करते हुए कहा कि पिछले वर्ष 11 अगस्त को न्यायालय द्वारा बीएचयू को अवैध रूप से पेड़ों की कटाई के मामले में दोषी पाया गया था। इसमें प्रत्येक पेड़ के सापेक्ष 20 पेड़ लगाने तथा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि जमा करने का आदेश बीएचयू को दिया गया था। याचिका का निस्तारण भी कर दिया गया था।
चोरी के आरोपों को सही पाया गया था।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन माह के भीतर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि के आकलन और वसूली का आदेश दिया गया था। सौरभ तिवारी ने एनजीटी को बताया कि इसके बावजूद न तो अवैध रूप से काटे गए प्रत्येक पेड़ के सापेक्ष 20 गुना पेड़ बीएचयू द्वारा लगाए गए और न ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने अब तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि का आकलन कर वसूली की है।
याचिकाकर्ता के पक्ष को सुनने के बाद एनजीटी ने बीएचयू, यूपीपीसीबी, राज्य सरकार, डीएफओ वाराणसी एवं जिलाधिकारी वाराणसी को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा। यूपीपीसीबी की ओर से स्थवी अस्थाना तथा राज्य सरकार, डीएम और डीएफओ की ओर से भंवर पाल सिंह जादौन ने नोटिस स्वीकार किया।
सौरभ तिवारी ने बताया कि बीएचयू परिसर में चंदन सहित अन्य पेड़ों की अवैध कटाई एवं चोरी के मामले में एनजीटी ने पिछले वर्ष 11 अगस्त को बीएचयू को दोषी करार दिया था। इस मामले में कुलपति, बीएचयू एवं अन्य के विरुद्ध वन विभाग द्वारा मुकदमा भी दर्ज किया गया था। इसके बाद एनजीटी द्वारा गठित प्रभागीय वनाधिकारी, वाराणसी एवं डीआईजी, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ की दो सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट में बीएचयू में अवैध वृक्ष कटान एवं चंदन वृक्ष चोरी के आरोपों को सही पाया गया था।