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विपक्ष के खिलाफ भड़के संत: काशी से सनातन शंखनाद, 3000 से अधिक संतों के जुटने का दावा; चंदा चोरी का मामला

Sun, 02 Aug 2026 07:18 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 02 Aug 2026 07:18 PM IST
सार

वाराणसी में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के बाद संत समाज ने देशव्यापी 'सनातन शंखनाद' अभियान का ऐलान किया है। संसद परिसर के बाहर हुए राजनीतिक प्रदर्शन का विरोध करते हुए संतों ने कार्रवाई न होने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी। श्री काशी विद्वत् परिषद और विहिप ने समर्थन दिया। 2 से 5 नवंबर तक काशी में संस्कृति संसद आयोजित होगी, जिसमें 3,000 से अधिक संतों के शामिल होने का दावा किया गया।

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Saints lash out at opposition Sanatan clarion call from Kashi over 3000 saints expected to gather
पत्रकारवार्ता को संबोधित करते संत समिति के पदाधिकारी। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे को लेकर संसद परिसर के बाहर हुए राजनीतिक स्वांग का विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। वाराणसी में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, बिहार के पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव तथा अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ शनिवार को वाराणसी के कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद संत समाज ने आंदोलन का ऐलान किया है।

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अखिल भारतीय संत समिति की बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए महामंत्रियों ने सनातन धर्म और साधु-संत समाज के विरुद्ध कथित षड्यंत्रों का कड़ा प्रतिकार करने की घोषणा की। काशी में आयोजित प्रेस वार्ता में समिति ने कहा कि सनातन विरोधी गतिविधियों को अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी उद्देश्य से देशव्यापी 'सनातन शंखनाद' अभियान शुरू करने की घोषणा की गई।
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अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि इसे भगवान आदि शंकराचार्य के शंकर दिग्विजय के दूसरे चरण के रूप में देखा जा सकता है। संत समाज ने दशकों पुरानी चुप्पी तोड़ दी है और अब सनातन धर्म के विरोधियों का वैचारिक और कानूनी स्तर पर जवाब दिया जाएगा।"

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पत्रकार वार्ता में जगद्गुरु बालक दास ने संसद परिसर में राहुल गांधी, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद द्वारा किए गए प्रदर्शन की आलोचना करते हुए इसे भगवान श्रीराम और सनातन धर्म का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना से करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस शीघ्र कार्रवाई नहीं करती है तो संत समाज इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगा। ।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि राजनीति में बार-बार साधु-संतों और भगवा वस्त्रों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "रावण ने भी सीता हरण के लिए साधु का वेश धारण किया था और उसका परिणाम उसके पूरे वंश के विनाश के रूप में सामने आया। आज जो लोग संतों के स्वरूप का उपहास कर रहे हैं, वे अपने राजनीतिक भविष्य को स्वयं संकट में डाल रहे हैं।"

इस राष्ट्रव्यापी अभियान को श्री काशी विद्वत् परिषद ने भी समर्थन देने की घोषणा की। परिषद के महामंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी तथा विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री अशोक तिवारी ने अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।

अखिल भारतीय संत समिति की बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए महामंत्री और कई साधु-संत उपस्थित रहे। इनमें उत्तराखंड से महामंडलेश्वर अरुण दास महाराज, जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंस देवाचार्य के उत्तराधिकारी, मध्य प्रदेश से महंत हनुमान दास, छत्तीसगढ़ से स्वामी राधेश्याम दास, उत्तर प्रदेश से स्वामी रामानंद तीर्थ, गोवा से स्वामी हर्षिद्धानंद सरस्वती, पालघर में मिशनरियों को सीधी चुनौती देने वाले महाराष्ट्र के स्वामी भारतानंद, बिहार से स्वामी रणजीतेशानंद, ओडिशा से स्वामी सच्चिदानंद दास तथा पश्चिम बंगाल से ब्रह्म विद्यानंद सहित दक्षिण भारत के प्रतिनिधि शामिल रहे।

बैठक में आगामी 2 से 5 नवंबर तक "संस्कृति संसद" आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। इसकी शुरुआत 2 नवंबर को राम मंदिर आंदोलन में वीरगति प्राप्त कारसेवकों की स्मृति में रुद्राभिषेक के साथ होगी। स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि संस्कृति संसद में देशभर की विभिन्न परंपराओं के 3,000 से अधिक संत भाग लेंगे।

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