UP: वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. एससी भारद्वाज का निधन, नेत्रदान से दो लोगों के जीवन में आएगा उजाला; किया नमन
वाराणसी के वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. एससी भारद्वाज का 13 अगस्त को निधन हो गया। उनके पुत्र डॉ. समीर भारद्वाज की सहमति से नेत्रदान कराया गया। डॉ. भारद्वाज ने कबीरचौरा अस्पताल में लंबे समय तक सेवाएं दीं। सरलता और सेवा भावना के लिए वह सम्मानित थे। उनके निधन पर चिकित्सा जगत में शोक है।
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वाराणसी के वरिष्ठ दंत चिकित्सक डॉ. सुधीर चंद भारद्वाज (डॉ. एससी भारद्वाज) का 13 अगस्त को निधन हो गया। उनका जन्म एक जनवरी 1948 को हुआ था। उनके निधन से चिकित्सा जगत, सामाजिक क्षेत्र और उनके असंख्य मरीजों व शुभचिंतकों में शोक की लहर है। निधन के बाद उनके पुत्र डॉ. समीर भारद्वाज की सहमति से उनका नेत्रदान कराया गया। लायंस आई बैंक के नेत्रबैंक मित्र डॉ. अरुण कुमार गुप्ता ने नेत्रदान की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सहयोग किया। डॉ. समीर ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।
डॉ. एससी भारद्वाज ने लंबे समय तक कबीरचौरा अस्पताल में दंत चिकित्सा के क्षेत्र में सेवाएं दीं। सरलता, विनम्र व्यवहार, सेवा भावना और मरीजों के प्रति आत्मीयता के कारण वह अत्यंत सम्मानित थे। चिकित्सा सेवा को उन्होंने केवल पेशा नहीं, बल्कि समाजसेवा का माध्यम माना। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के उपचार में भी वह विशेष रुचि लेते थे।
लायंस आई बैंक के सचिव डॉ. अनुराग टंडन ने बताया कि परिवार की सहमति से नेत्रदान कराया गया। लायंस आई बैंक के निदेशक डॉ. अभिषेक चंद्रा ने कहा कि डॉ. भारद्वाज का नेत्रदान समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश है। किसी दिवंगत व्यक्ति की आंखों से दो लोगों के जीवन में रोशनी पहुंच सकती है।
निधन की सूचना पर उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। चिकित्सा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उनके अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीबी सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. भारद्वाज ने चिकित्सा सेवा को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा और उनका व्यक्तित्व सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
डॉ. भारद्वाज की सहज उपलब्धता और मरीजों के प्रति आत्मीय व्यवहार को लोग आज भी याद कर रहे हैं। उनके निधन से चिकित्सा जगत ने एक समर्पित चिकित्सक और समाज ने संवेदनशील सेवाभावी व्यक्तित्व खो दिया।