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छत्तीसगढ़ की नई पहचान...: नक्सल क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल कोर्ट तक पहुंचे खिलाड़ी, जानें- खास
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Wed, 07 Jan 2026 04:46 PM IST
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सार
Varanasi News: सिगरा स्टेडियम में चल रही सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ की टीम ने अपने खेल से सबका ध्यान खींचा है। बातचीत के दौरान कोच नितिन पांडेय ने कहा कि आदिवासी युवाओं को मंच मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ की टीम की खिलाड़ी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिन इलाकों का नाम कभी नक्सल हिंसा, बंदूक और खौफ से जुड़ा रहा, आज वहीं से निकल रहे खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का परचम लहरा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर जैसे नक्सल प्रभावित जिले अब केवल संघर्ष की कहानी नहीं बल्कि संभावनाओं और खेल प्रतिभा की नई पहचान बनते जा रहे हैं।
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सिगरा स्टेडियम में चल रही सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ की टीम ने अपने खेल से सबका ध्यान खींचा है। प्रतियोगिता के तीसरे दिन छत्तीसगढ़ टीम के कोच नितिन पांडेय ने बताया कि जिन इलाकों को कभी असुरक्षित माना जाता था, वहां अब खेल मैदान तैयार हो रहे हैं। आदिवासी युवाओं को मंच मिल रहा है।
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बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जैसे क्षेत्रों से निकले खिलाड़ी नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। छत्तीसगढ़ अब तक तीन बार इनडोर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप की मेजबानी कर चुका है जो राज्य में खेलों के बढ़ते कद का प्रमाण है।
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वॉलीबॉल के साथ-साथ राज्य में हॉकी, क्रिकेट, तीरंदाजी और बैडमिंटन के लिए भी बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो रहा है। सरकार और स्पोर्ट्स एसोसिएशन की पहल से खेल की भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों को अवसर में बदला जा रहा है।