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देश का सबसे बड़ा भंडार!: सोनभद्र में एल्युमिनियम सिलिकेट, यूपी-झारखंड सीमा पर हैं छह ब्लॉक; 26% तक ग्रेड आंका
Tue, 30 Jun 2026 02:15 PM IST
Sharukh Khan
कौशलेंद्र पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, सोनभद्र
कौशलेंद्र पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, सोनभद्र
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 30 Jun 2026 02:15 PM IST
सार
यूपी में एल्युमिनियम सिलिकेट का भंडार मिला है। यूपी और झारखंड सीमा पर छह ब्लॉक हैं। देश का सबसे बड़ा भंडार होने का भी अनुमान है। कोन-विंढमगंज के 48 वर्ग किमी क्षेत्र में चार चरणों में सर्वेक्षण हो चुका है। संभावित खनन को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है।
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sonbhadra mining
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
सोनभद्र जिले में एल्युमिनियम सिलिकेट अयस्क (एंडालुसाइट) का बड़ा भंडार मिला है। भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम) की रिपोर्ट 2024 के अनुसार, उत्तर प्रदेश और झारखंड की सीमा पर एंडालुसाइट के छह नए ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं। कुल भंडार का 91 प्रतिशत यानी 114.25 मिलियन टन अनुमानित सोनभद्र में है। देश का सबसे बड़ा एंडालुसाइट का भंडार होने का भी अनुमान है। ब्राजील और श्रीलंका एंडालुसाइट के प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल हैं।
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) की ओर से कोन-विंढमगंज क्षेत्र से जुड़े 48 वर्ग किलोमीटर इलाके में चार चरणों में किए गए सर्वेक्षण में उत्साहजनक परिणाम मिलने के बाद विस्तृत शोध, ड्रिलिंग और संभावित खनन को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
लखनऊ विश्वविद्यालय और बीएचयू के भू-वैज्ञानिकों की टीम कई बार जिले के खनिज भंडारों का सर्वे कर चुकी है। सर्वेक्षण में रेणुकूट वन प्रभाग स्थित जमतिहवा नाला की लगभग 180 करोड़ वर्ष पुरानी चट्टानों से लेकर रजखड़ और दुद्धी के उत्तर की पहाड़ियों तक एंडालुसाइट की परतें मिलने की संभावनाएं सामने आई हैं।
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जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) की ओर से कोन-विंढमगंज क्षेत्र से जुड़े 48 वर्ग किलोमीटर इलाके में चार चरणों में किए गए सर्वेक्षण में उत्साहजनक परिणाम मिलने के बाद विस्तृत शोध, ड्रिलिंग और संभावित खनन को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय और बीएचयू के भू-वैज्ञानिकों की टीम कई बार जिले के खनिज भंडारों का सर्वे कर चुकी है। सर्वेक्षण में रेणुकूट वन प्रभाग स्थित जमतिहवा नाला की लगभग 180 करोड़ वर्ष पुरानी चट्टानों से लेकर रजखड़ और दुद्धी के उत्तर की पहाड़ियों तक एंडालुसाइट की परतें मिलने की संभावनाएं सामने आई हैं।
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छह फ्री होल्ड डिपॉजिट (ब्लॉक) चिन्हित
वहीं, वर्ष 2012-13 से 2020-21 तक जीएसआई ने चार चरणों में झारखंड से सटे कोन-विंढमगंज क्षेत्र (सलईडीह-हरवरिया क्षेत्र) के लगभग 48 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया था। भारतीय खान ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल 2020 तक जीएसआई की ओर से किए गए सर्वेक्षण के आधार पर उत्तर प्रदेश और झारखंड में एंडालुसाइट के छह फ्री होल्ड डिपॉजिट (ब्लॉक) चिन्हित किए गए।
वहीं, वर्ष 2012-13 से 2020-21 तक जीएसआई ने चार चरणों में झारखंड से सटे कोन-विंढमगंज क्षेत्र (सलईडीह-हरवरिया क्षेत्र) के लगभग 48 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया था। भारतीय खान ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल 2020 तक जीएसआई की ओर से किए गए सर्वेक्षण के आधार पर उत्तर प्रदेश और झारखंड में एंडालुसाइट के छह फ्री होल्ड डिपॉजिट (ब्लॉक) चिन्हित किए गए।
एंडालुसाइट का औसत ग्रेड 24 से 26 प्रतिशत आंका
इनमें सोनभद्र के सलईडीह-हरवरिया, फुलवार समेत पांच ब्लॉक शामिल हैं, जहां 114.25 मिलियन टन (91 प्रतिशत) भंडार होने का अनुमान है। झारखंड के गढ़वा जिले के नगर-उंटारी क्षेत्र में 11.8 मिलियन टन (9 प्रतिशत) भंडार मिला है। एंडालुसाइट का औसत ग्रेड 24 से 26 प्रतिशत आंका गया है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और रायपुर, ओडिशा के मलकानगिरी, राजस्थान के झुंझुनू, नागौर और टोंक तथा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में भी एंडालुसाइट के संकेत मिले हैं।
इनमें सोनभद्र के सलईडीह-हरवरिया, फुलवार समेत पांच ब्लॉक शामिल हैं, जहां 114.25 मिलियन टन (91 प्रतिशत) भंडार होने का अनुमान है। झारखंड के गढ़वा जिले के नगर-उंटारी क्षेत्र में 11.8 मिलियन टन (9 प्रतिशत) भंडार मिला है। एंडालुसाइट का औसत ग्रेड 24 से 26 प्रतिशत आंका गया है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और रायपुर, ओडिशा के मलकानगिरी, राजस्थान के झुंझुनू, नागौर और टोंक तथा उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में भी एंडालुसाइट के संकेत मिले हैं।
सिलिमेनाइट के भी बड़ा भंडार होने के हैं संकेत
सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, सोनभद्र जिले की दक्षिणी सीमा पर छत्तीसगढ़ से सटे बभनी-बीजपुर क्षेत्र में सिलिमेनाइट (एल्युमिनो सिलिकेट खनिज) चट्टानों में बिखरे हुए क्रिस्टल के रूप में पाया गया है। यह पूरा क्षेत्र 600 मीटर से अधिक चौड़ा है और पूर्व में आसनडीह से पश्चिम में बाजिया तक छह किलोमीटर से अधिक दूरी में फैला है।
सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, सोनभद्र जिले की दक्षिणी सीमा पर छत्तीसगढ़ से सटे बभनी-बीजपुर क्षेत्र में सिलिमेनाइट (एल्युमिनो सिलिकेट खनिज) चट्टानों में बिखरे हुए क्रिस्टल के रूप में पाया गया है। यह पूरा क्षेत्र 600 मीटर से अधिक चौड़ा है और पूर्व में आसनडीह से पश्चिम में बाजिया तक छह किलोमीटर से अधिक दूरी में फैला है।
इस बेल्ट के मध्य भाग में छिपिया गांव के पास 200 मीटर चौड़े क्षेत्र में सिलिमेनाइट के बड़े क्रिस्टल मिलने के संकेत हैं। रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई है कि इस बेल्ट के भीतर 10 से 25 मीटर चौड़े ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें 16 से 32 प्रतिशत (औसतन 25 प्रतिशत) सिलिमेनाइट मौजूद है। इसका कुल अनुमानित भंडार 10 मिलियन टन बताया गया है।
कई उद्योगों में होता है एंडालुसाइट का उपयोग
एंडालुसाइट खनिज का उपयोग रत्न के रूप में भी किया जाता है। औद्योगिक क्षेत्र में इसका प्रमुख उपयोग इस्पात, सीमेंट और कांच उद्योगों में उच्च तापमान वाली भट्टियों की लाइनिंग के लिए अग्निरोधी ईंटें और ब्लॉक बनाने में होता है। यह अत्यधिक तापमान और रासायनिक दबाव को बिना पिघले सहन कर सकता है।
एंडालुसाइट खनिज का उपयोग रत्न के रूप में भी किया जाता है। औद्योगिक क्षेत्र में इसका प्रमुख उपयोग इस्पात, सीमेंट और कांच उद्योगों में उच्च तापमान वाली भट्टियों की लाइनिंग के लिए अग्निरोधी ईंटें और ब्लॉक बनाने में होता है। यह अत्यधिक तापमान और रासायनिक दबाव को बिना पिघले सहन कर सकता है।
ऑटोमोबाइल स्पार्क प्लग, उच्च गुणवत्ता वाले सिरेमिक उत्पाद, धातु ढलाई के सांचे और कोर बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है। पारदर्शी और रंगीन एंडालुसाइट को तराश कर आकर्षक रत्न भी तैयार किए जाते हैं। सिलिमेनाइट का उपयोग इस्पात, कांच, सिरेमिक, इंसुलेटर, उच्च वोल्टेज स्पार्क प्लग, सीमेंट भट्टियों और पेट्रोकेमिकल रिफाइनरियों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
सोनभद्र में एंडालुसाइट का बड़ा भंडार है। व्यावसायिक दृष्टि से इसकी काफी उपयोगिता है। विस्तृत सर्वेक्षण और खनन शुरू होने पर जिले में बड़े औद्योगिक निवेश और रोजगार की संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। - प्रो. विभूति राय, भू-विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय।
खनिज सर्वेक्षण का कार्य जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया करता है। खनिज सर्वेक्षण और खनन से जुड़ी अन्य प्रक्रियाएं मुख्यालय स्तर से संचालित होती हैं। फिलहाल इस संबंध में जिला स्तर पर जानकारी उपलब्ध नहीं है। - कमल कश्यप, वरिष्ठ खान अधिकारी, सोनभद्र।