बिहार के सरकारी अस्पतालों में जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं। ऐसा ही एक मामला औरंगाबाद के सदर अस्पताल से जुड़ा सामने आया है, जहां एक वायरल वीडियो ने पूरे प्रकरण की पोल खोल दी है। हालांकि इस वीडियो की तिथि और समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
वायरल वीडियो में जन्म प्रमाण पत्र काउंटर पर मौजूद एक कर्मी रुपये लेते हुए दिखाई दे रहा है। आरोप है कि यह कर्मी स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी उमेश पासवान है, जो प्रमाण पत्र में सुधार के नाम पर पैसे की मांग कर रहा था। वीडियो में एक व्यक्ति काउंटर पर उससे बातचीत करते हुए पैसे देने की कोशिश करता नजर आ रहा है।
बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान दोनों के बीच पैसों को लेकर मोलभाव भी हुआ। जैसे ही कर्मी को यह एहसास हुआ कि उसका वीडियो बनाया जा रहा है, वह भड़क उठा और कैमरा बंद करने को कहने लगा। साथ ही उसने फोन पर किसी अधिकारी से संपर्क करने की भी कोशिश की।
वीडियो में दिख रहे पीड़ित, औरंगाबाद सदर प्रखंड के कर्मा गांव निवासी राजेश कुमार ने बताया कि वह अपने बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र में त्रुटि सुधार के लिए कई दिनों से अस्पताल का चक्कर लगा रहे थे। आरोप है कि उनसे 300 रुपये की मांग की गई। पहले नगद राशि नहीं होने पर उन्हें वापस लौटा दिया गया। बाद में जब वह 200 रुपये लेकर पहुंचे, तो कर्मी ने 300 रुपये से कम लेने से इनकार कर दिया।
वीडियो वायरल होने के बाद जब मीडियाकर्मी मौके पर पहुंचे, तो अन्य लोगों ने भी अवैध वसूली के आरोप लगाए। गया से आई स्वीटी कुमारी ने बताया कि वह पिछले 10 महीने से अपने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र के लिए अस्पताल का चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक प्रमाण पत्र नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रक्रिया के दौरान उनसे भी पैसे मांगे गए, बावजूद इसके काम नहीं हुआ।
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नवीनगर के राजपुर गांव की हनी कुमारी ने भी आरोप लगाया कि उसने 500 रुपये देने के बावजूद अब तक अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया। उनका कहना है कि दो महीने पहले बच्चे के जन्म के बाद से ही वह लगातार अस्पताल के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया जाता है।
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी सदर अस्पताल में इस तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। पूर्व में एक कर्मी के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जानबूझकर प्रक्रिया को लंबा खींचा जाता है, ताकि आवेदक पैसे देने को मजबूर हो जाएं। जबकि नियमों के अनुसार अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों का प्रमाण पत्र वहीं उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
मामले पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि वायरल वीडियो की जांच कराई जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा।