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राजस्थान में नौकरी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: चार साल में 15 करोड़ की ठगी, मुख्य आरोपी गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालोर Published by: जालौर ब्यूरो Updated Mon, 06 Apr 2026 09:15 AM IST
राजस्थान के जालोर जिले में सरकारी नौकरी के नाम पर बेरोजगार युवाओं को ठगने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। कोतवाली थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी राकेश जीनगर को गिरफ्तार कर लिया है। चार साल से यह शातिर ठग युवाओं को जयपुर नगर निगम और डीएलबी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये हड़प रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि अब तक करीब 200 लोग इसके जाल में फंस चुके हैं और ठगी की कुल रकम 12 से 15 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
फर्जी मेल से भेजता था नकली जॉइनिंग लेटर
मूल रूप से पाली जिले के तखतगढ़ का रहने वाला राकेश जीनगर जालोर के रतनपुरा रोड स्थित शकर वाटिका क्षेत्र में रहता था। वह खुद को शहरी आजीविका केंद्र में योजना प्रभारी बताकर नौकरी चाहने वाले युवाओं से संपर्क करता था। भरोसा जीतने के बाद 3 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूलता था। रकम मिलने के बाद जयपुर नगर निगम के नाम से बनाई गई फर्जी ईमेल आईडी से नकली जॉइनिंग लेटर भेज दिया जाता था।
इतना ही नहीं, पीड़ितों को पूरी तरह विश्वास में लेने के लिए आरोपी उन्हें जालोर के लालपोल स्थित शहरी आजीविका केंद्र में बैठाकर नौकरी का नाटक करता था। कई बेचारे युवा डेढ़ साल तक बिना किसी वेतन और बिना किसी असली काम के वहां बैठे रहे। उन्हें लगातार उम्मीद दिलाई जाती रही कि जल्द ही सब ठीक हो जाएगा।
पुलिस जांच में सामने आया मामला
मामला तब खुला, जब लंबे इंतजार के बाद पीड़ितों ने 27 मार्च को हरियाली निवासी मुकेश, रणछोड़ और रितिक ने कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। रितिक से 10 लाख रुपये और मुकेश व रणछोड़ से तीन-तीन लाख रुपये ठगे गए थे। जांच में पहले 11 पीड़ितों से 56 लाख रुपये की ठगी सामने आई, लेकिन अब 30 पीड़ित सामने आ चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। पुलिस जांच में यह भी उजागर हुआ कि आरोपी द्वारा जारी किए गए तमाम नियुक्ति पत्र पूरी तरह जाली हैं और किसी भी नगर निकाय के सरकारी रिकॉर्ड में इनका कोई नामोनिशान नहीं है।
कोतवाली पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है और पूरे नेटवर्क की परतें उधेड़ी जा रही हैं। मामले में शामिल अन्य साथियों की भी सक्रियता से तलाश जारी है।
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