अयोध्या के राम मंदिर में चंदा और चढ़ावा चोरी के कथित मामले को लेकर सियासत गरमा गई है। जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय (राजीव भवन) में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान महासमुंद विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर राम मंदिर के नाम पर दशकों से एकत्र किए गए चंदे का हिसाब जनता को क्यों नहीं दिया जा रहा है?
आस्था के नाम पर राजनीति और चंदे में हेराफेरी का आरोप
पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं। देश के गरीब, किसान, मजदूर और महिलाओं ने अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई और बचत राम मंदिर निर्माण के लिए दान की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने लगभग तीन दशकों तक राम नाम पर राजनीति की और सत्ता हासिल की, लेकिन आज करोड़ों रामभक्त यह पूछने पर मजबूर हैं कि यह चंदा आखिर किसकी शह पर लूटा गया।
यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं, आस्था से विश्वासघात है
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने इसे एक बड़ा वैचारिक और धार्मिक घोटाला बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक आर्थिक हेराफेरी नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के साथ किया गया घोर विश्वासघात है। मंदिर निर्माण के समय रामशिला पूजन के नाम पर 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्रित की गई थी, जिसका जवाब आरएसएस और भाजपा के लोग आज तक नहीं दे पाए हैं। उन्होंने आगे जोड़ा कि जिन लोगों ने पहले चंदे में हेराफेरी की, वही लोग अब मंदिर बनने के बाद चढ़ावे में हेराफेरी करने लगे हैं।
मोदी और शाह लें नैतिक जिम्मेदारी: कांग्रेस
विनोद चंद्राकर ने इस पूरे मामले के लिए सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि चूंकि राम मंदिर न्यास ट्रस्ट का गठन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा किया गया था, इसलिए इस पूरे कथित घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने 'देवद्रव्य' (भगवान के धन) की चोरी करने के महापाप को संरक्षण दिया है।
कांग्रेस पार्टी की प्रमुख मांगें
प्रधानमंत्री की स्पष्टता: प्रधानमंत्री स्पष्ट करें कि ट्रस्ट के गठन, शीर्ष नियुक्तियों और प्रशासनिक निगरानी में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की क्या भूमिका रही है और वे इस विषय पर मौन क्यों हैं।
FIR और गिरफ्तारी: चंपत राय, अनिल मिश्रा और इस कथित घोटाले में शामिल सभी प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच: पूरे प्रकरण की स्वतंत्र न्यायिक जांच सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की निगरानी में कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
ट्रस्ट को भंग करना: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग कर धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों, प्रशासनिक विशेषज्ञों और स्वतंत्र सदस्यों को मिलाकर एक नया, पारदर्शी ट्रस्ट गठित किया जाए।
फॉरेंसिक ऑडिट: राम मंदिर के लिए प्राप्त समस्त चंदे, चढ़ावे, भूमि खरीद और खर्चों का एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए और उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।

राम मंदिर विवाद पर पीसी - फोटो : credit
राम मंदिर विवाद पर पीसी - फोटो : credit
राम मंदिर विवाद पर पीसी - फोटो : credit