जिले के खरखरा जलाशय में मछली पालन के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण एक बुजुर्ग मजदूर की जान चली गई। शुक्रवार को 65 वर्षीय सुखराम सलाम मछली पालन गेज में दाना डालने गहरे पानी में गया और डूब गया। सूचना मिलने पर एसडीआरएफ की टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद बुजुर्ग का शव बरामद कर पुलिस को सौंपा।
सूत्रों के अनुसार, इस हादसे में मछली पालन ठेकेदार की घोर लापरवाही सामने आई है। मृतक को बिना किसी सुरक्षा उपकरण या लाइफ जैकेट के जलाशय के बीच बने गेज तक भेजा गया था। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि बुजुर्ग ने पानी में जाने से मना किया था।
लेकिन ठेकेदार के कथित दबाव के कारण उसे जोखिम उठाना पड़ा, जो जानलेवा साबित हुआ। कंट्रोल रूम दुर्ग से सूचना पर जिला सेनानी नागेंद्र कुमार सिंह के निर्देश पर एसडीआरएफ की टीम घटनास्थल पहुंची। प्रभारी ईश्वर खरे के नेतृत्व में टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। डीप डाइविंग एक्सपर्ट राजकुमार यादव ने जलाशय की गहराई में उतरकर शव खोज निकाला। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में हबीब खान, विनय, राजू महानंद, आशीष, ओंकार, दिनेश, गोपी और सूरज की मुख्य भूमिका रही।
पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान सुखराम सलाम (पिता दिवंगत पुसऊराम, 65 वर्ष) के रूप में हुई है। वह कांकेर जिले के अन्नपूर्णा पारा का निवासी था। डौंडीलोहारा थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ठेकेदार द्वारा सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के आरोपों की गंभीरता से जांच की जाएगी। यदि लापरवाही सिद्ध होती है, तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जलाशय के गहरे पानी में काम करने वाले मजदूरों के लिए अनिवार्य सुरक्षा गाइडलाइंस का पालन न होना चिंता का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बुजुर्ग के पास लाइफ जैकेट होती, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। यह घटना मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रशासन को ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाने चाहिए।