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'दुष्कर्म से पीड़िता खो देती है अपनी गरिमा': आरोपी की याचिका खारीज, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने की अहम टिप्पणी
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 16 Jun 2026 03:32 PM IST
हाईकोर्ट ने महिला सुरक्षा और उनके आत्मसम्मान पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म के बाद महिला अपनी गरिमा खो देती है। समाज का सामना करने की मानसिक प्रताड़ना उसे आत्महत्या के लिए उकसाती है।
इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल थाना क्षेत्र के एक मामले में आरोपी की 10 वर्ष की सजा बरकरार रखी। न्यायाधीश एनके व्यास की एकल पीठ ने आरोपी विजय कुमार वर्मा की आपराधिक अपील खारिज कर दी। घटना 22 अगस्त 2004 की है, जब पीड़िता घर में अकेली थी।
आरोपी विजय कुमार जबरन घर में घुसा और पीड़िता के साथ अनाचार किया। पीड़िता के भाई के लौटने पर आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था, जिसे भाई ने पकड़ लिया। घटना से आहत पीड़िता ने मिट्टी का तेल उड़ेलकर आत्मदाह कर लिया। अस्पताल ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया, लेकिन भाभी को घटना बताई थी। विचारण न्यायालय ने विजय कुमार को दुष्कर्म और आत्महत्या के दुष्प्रेरणा का दोषी पाया था। न्यायालय ने धारा 376(1) के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 3000 रुपये अर्थदंड दिया था।
प्रेम प्रसंग की दलील खारिज
न्यायालय ने साक्ष्यों के अध्ययन के बाद प्रेम प्रसंग की दलील को खारिज कर दिया। घटनास्थल से मृतका का फटा हुआ सलवार और कपड़ा मिला था। न्यायालय ने कहा कि आपसी सहमति के मामले में कपड़े फटे नहीं होते। यह दर्शाता है कि पीड़िता ने खुद को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था।
आरोपी को आत्मसमर्पण का निर्देश
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी का कृत्य ही पीड़िता की आत्महत्या का सीधा कारण था। न्यायालय ने ऐसे जघन्य मामलों में उदारता न दिखाने की बात कही। हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत और मुचलके को तत्काल रद्द कर दिया। उसे दो महीने के भीतर संबंधित विचारण न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
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