श्रम न्यायालय राजनांदगांव ने 256 श्रमिकों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस फैसले के तहत प्रत्येक श्रमिक को तीन लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मिलेगी। यह निर्णय राजनांदगांव जिले के रीवागहन में स्थित मीन उलरॉक फाइबर लिमिटेड से संबंधित है।
यह कारखाना वर्ष 1990-91 में स्थापित हुआ था, जिसमें लगभग 256 श्रमिक कार्यरत थे। वर्ष 2016 में प्रबंधन ने फैक्टरी को बिना छंटनी मुआवजा दिए बंद कर दिया था। प्रबंधन ने श्रमिकों के वेतन, ग्रेच्युटी और बोनस का भुगतान करने में भी उदासीनता बरती थी।
इसके बाद श्रमिकों ने श्रम न्यायालय राजनांदगांव में मामला दायर किया था। न्यायालय ने सुनवाई के बाद श्रमिकों के पक्ष में फैसला दिया है। यह भुगतान दो माह के भीतर किए जाने का निर्देश दिया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले से बड़ी संख्या में श्रमिकों को लाभ मिलेगा।
मीन उलरॉक फाइबर लिमिटेड रीवागहन में 256 श्रमिक काम करते थे। वर्ष 2016 में फैक्ट्री को अचानक बंद कर दिया गया था। प्रबंधन ने श्रमिकों को कोई छंटनी मुआवजा नहीं दिया। उनके वेतन, ग्रेच्युटी और बोनस का भुगतान भी रोक दिया गया था। श्रमिकों ने अपने अधिकारों के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
श्रम न्यायालय ने श्रमिकों की अपील को स्वीकार किया। न्यायालय ने प्रत्येक श्रमिक को तीन लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। यह राशि प्रबंधन को दो माह के भीतर चुकानी होगी। इस ऐतिहासिक फैसले से श्रमिकों को न्याय मिला है। यह निर्णय उनके आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।