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मेरा गांव मेरी शान: देशभर में मशहूर है गांव चांग की बागवानी, 13वीं सदी का है गांव का इतिहास
जिले की उत्तर दिशा में रोहतक जिले की सीमा के साथ लगता जिला मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर दूर भिवानी-महम मुख्य मार्ग पर स्थित जिले का पहला गांव चांग करीब सात सदियों से भी ज्यादा लंबे समय से बसा हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार गांव का इतिहास 13वीं सदी से माना जाता है। आजादी से पहले गांव मुस्लिम बाहुल्य था। फिलहाल की बात करें तो गांव अनुसूचित जाति वर्ग (एससी) व पंजाबी बाहुल्य है।
वहीं सभी जातियों व धर्मों के लोग आपस में मिलजुल कर रहते हैं। गांव में करीब 95 प्रतिशत आबादी हिंदू है तो सिख, ईसाई व मुस्लिम धर्म को मानने वालों की संख्या भी पर्याप्त है। गांव में 9 हजार मतदाता हैं तथा गांव की आबादी करीब 26 हजार पहुंच चुकी है। दरअसल, गांव चांग को 1960 के दशक में महता खीला राम के नाम से जाना जाता था। जो गांव के बड़े जमींदार हुआ करते थे। लेकिन अब गांव का नाम संत आश्रम के संस्थापक स्वामी रामानंद महाराज के नाम से प्रसिद्ध है। स्वामी रामानंद महाराज ने 1982 में गांव में संत आश्रम की स्थापना की थी। उनकी सुरीली वाणी को सुनकर हर कोई उनका कायल हो जाता था। स्वर्गीय पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल की करीब 100 एकड़ कृषि भूमि आज भी चांग में मौजूद है, जिन्होंने गांव चांग को राजधानी बनाने की मुहिम शुरू की थी। 10 अगस्त 2012 को स्वामी रामानंद महाराज के ब्रह्मलीन होने के बाद उनके शिष्य स्वामी मंगलानंद महाराज उनके बताए हुए मार्ग पर चलते हुए आश्रम का संचालन कर रहे हैं। चौधरी बंसीलाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले स्वर्गीय भोपा राम ने करीब पांच बार सरपंच व एक बार चेयरमैन बनकर गांव चांग की सेवा की है। वे गांव के इकलौते सरपंच थे, जिनको ग्रामीणों ने पांच बार गांव की सरपंची सौंपी थी। वहीं, प्रसिद्ध उद्योगपति स्व लाॅड स्वराज पाॅल का परिवार भी गांव चांग में रहा है, जिनको लंदन में लाॅड की उपाधि से नवाजा गया था। राजनीति की बात करे तो गांव ढाणी चांग के शशी रजंन परमार 2000 में मुंढाल हलके से विधायक बने थे। वहीं ढाणी चांग निवासी हिमानी परमार पंजाब व हरियाणा होई कोर्ट में सिविल जज है।
होशियार सिंह सभरवाल ने बताया कि वर्षों पहले गांव सावड़ से एक सिख परिवार गांव चांग आया था । जिनमें जैत सिंह व बसन्तपाल नाम के दो व्यक्ति थे उन्होंने गांव के पानी व सुविधाए अच्छी लगी इसलिए अपनी भाषा में चंगा बताया था। उसके बाद से ही गांव का नाम चांग पड़ा था। वही गांव चांग निवासी आकाश बाबा पेले अपनी कामेडी के सहारे गांव का नाम रोशन करने का काम कर रहें हैं।
गांव की आबादी बढ़ने पर वर्ष 2000 में गांव में दो पंचायतें बन गई थी। एक पंचायत को चांग व दूसरी को ढाणी चांग के नाम से जाना जाता है। चांग में करीब 9000 व ढाणी चांग में 1500 वोट हैं।
गांव चांग में शहर व कस्बों की तर्ज पर पुराना मुख्य बाजार है। जिसमें गांव सहित आसपास के गांवों के लोग खरीददारी करने आते। गांव में दो राजकीय प्राईमरी, कक्षा बारहवीं तक के दो राजकीय सहित तीन निजी स्कूल, दो निजी हाई व मिडिल स्कूल हैं। गांव में 33 केवी पावर सब स्टेशन बना है। अनाज मंडी, सब्जी मंडी, दो जलघर, डाकघर, पीएचसी, पशु अस्पताल, आंगनवाड़ी केंद्र, खेल स्टेडियम, पंचायत घर की सुविधाएं हैं।
ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय खेती बाड़ी है। जिसमें सब्जी व फलों की बागवानी से लेकर गेहूं, धान, कपास, बाजरा, सरसों, ईंख की मुख्य खेती की जाती है। चांग को अमरूद व बेर की बागवानी के अतिरिक्त सब्जी उत्पादन में ज्यादा जाना जाता है। जिनकी आपूर्ति देश के बड़े शहरों में की जाती है। गाजर उत्पादन में तो चांग प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में सरताज माना जाता है। गांव की बेटी डॉ. शिल्पी बिब्बा, डॉ. ममता शर्मा एमडी, भारती जांगड़ा बीडीपीओ व डाॅक्टर दीपक अरोड़ा चंडीगढ़ में अपनी सेवाएं दे रहे है। गांव के पतराम रोहिल्ला हरियाणा पुलिस से पुलिस अधीक्षक के पद से सेवानिवृत हुए थे। वहीं हरि सिंह लांग्यान जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। गांव के स्व. रतीराम टांक आजाद हिंद फौज में के हिस्सा रहे हैं, जिनकी बहादुरी के किस्से आज भी सुने जाते हैं।
हमारा गांव चांग उन महान विभूतियों से जुड़ा हुआ है। जिनका नाम पूरी दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है। लॉर्ड स्वराज पाल जैसे वैश्विक व्यक्तित्व के पिता इसी गांव के निवासी थे। यह हमारे लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। हमारा चांग गांव सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे भविष्य की नींव हैं। सभी मेहनत और संस्कारों से मिलकर विकास की नई कहानी लिख रहे हैं।
- राजा चांदना चांगिया, ग्रामीण
गांव चांग में 36 बिरादरी के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते है। सभी लोग धार्मिक कार्यक्रमों को एक साथ मनाते है। गांव संत आश्रम के महाराज स्व स्वामी रामानंद व स्व. चौ बंसीलाल के नाम से चांग को जाना जाता है।
- पवन नंबरदार, ग्रामीण।
गांव चांग के लोग आपसी भाईचारे व युवा अच्छी शिक्षा की बदौलत सेना सहित अन्य महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवा दे रहे है। युवा मेहनत करते हुए अपने सपने साकार कर रहे है। ग्रामीण एक दूसरे के कार्यों में खुले दिल से सहयोग करते है, जिससे भाईचारा बढ़ता है।
- राहुल ग्रेवाल, ग्रामीण।
गांव चांग के किसान बागवनी में लंबे समय से पहचान बनाए हुए है। चांग के बेर व अमरूद पंजाब में सहित देश भर में प्रसिद्ध है। गाजर उत्पादन में तो चांग प्रदेश ही नही बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान से जाना जाता है। इसके अलावा गांव के व्यक्ति बड़े-बड़े पदों पर अपनी सेवा दे चुके है।
- संजय ललित, ग्रामीण।
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