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कारगिल युद्ध के हीरो ग्रनेडियर शक्ति सिंह जो आज भी गोलियां शरीर में लिए घूम रहे
Video Desk Amar Ujala Dot Com Published by: Chandra Prakash Neeraj Updated Sat, 25 Apr 2026 07:18 PM IST
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कारगिल युद्ध में तीन ओर से दुश्मन से घिरे ग्रनेडियर शक्ति सिंह पर अंधाधुंध फायरिंग हो रही थी , पास में साथी की लाश पड़ी थी इसके बाद भी वह 24 घंटे तक अपनी पोस्ट पर डटे रहे। दुश्मन पर लगातार फायरिंग करते रहे तो पाकिस्तानी घुसपैठिए उन पर गोलियां बरसाते रहे। इसी दौरान भारतीय सेना की दूसरी टुकड़ी ने पीछे की ओर से जाकर टाइगर हिल पर जमे दुश्मनों को मार गिराया। रौंगटे खड़े कर देने वाली बहादुरी की इस कहानी के हीरो शक्ति सिंह आज भी अपने शरीर में पाकिस्तान की तीन गोलियां, 30 से अधिक निशान लेकर देश सेवा का जज्बा जगा रहे हैं। अमर उजाला से खास बातचीत में गांव भगाना निवासी कारगिल के हीरो 18 ग्रनेडियर के सैनिक शक्ति सिंह ने बताया कि कारगिल युद्ध में पहले उनकी टुकड़ी को बारामूला सेक्टर में लगाया गया था।हमारी टुकड़ी ने इस पहाड़ी पर कब्जा ले लिया। बमबारी में हमारे 14 सैनिक सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद हमारी टुकड़ी को 2 जुलाई को टाइगर हिल पर कब्जा करने का टास्क दिया गया। दो दिन तक हम रुक रुक पर पहाड़ी पर चढ़ते रहे। 4 जुलाई की रात तब चोटी पर चढ़े। मैंने दुश्मन के दो बंकर तोड़े जिसमें दोनों में दो दो दुश्मन छिपे थे। मैंने चारों का मार कर आगे बढ़ता गया। मैं सबसे आगे था जब पहाड़ी पर चढ़कर एमएमजी लगाई तो तीन तरफ से मेरे पर गोलियां बरसने लगी। मेरे साथी रवि करण के सिर में गोली लगी। उसके हेलमेट को पार करते हुए गोली सिर से आरपार होने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मेरी जांघ में भी तीन गोलियां लगी। मेरा तीसरा साथी राजेश मेरी पट्टी कर रहा था इसी दौरान उसके मुंह में गोली लगी। मैंने उससे कहा कि तुम तुरंत नीचे चले जाओ मैं यहां मोर्चा संभाल लूंगा। मैं तीनों के हथियार लेकर मोर्चे पर डटा रहा। गोलियां लगी होने के बावजूद मैं 24 घंटे तक वहां मोर्चे पर अकेला लड़ता रहा। दुश्मन पर लगातार फायर करता रहा। दुश्मन को लगा कि भारतीय सेना इसी प्वाइंट पर है। इस बीच हमारी सेना की दूसरी टुकड़ी के योगेंद्र यादव ,कैप्टन बलवान सिंह की टीम ने पीछे से हमला बोल कर दुश्मनों को खत्म कर टाइगर हिल को कब्जा मुक्त कराया।
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