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farmer in Fatehabad drove a tractor over a standing flower crop, claiming he was incurring losses due to low prices
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फतेहाबाद में फूलों की खड़ी फसल पर किसान ने चलाया ट्रैक्टर, बोले-कम भाव मिलने से हो रहा था घाटा
शादियों के सीजन में जहां एक तरफ खुशियों की गूंज है, वहीं फूलों की खेती करने वाले किसानों पर आर्थिक संकट गहरा गया है। किसानों को गेंदा फूल का उचित भाव नहीं मिल रहा है। इससे किसानों के लिए यह सीजन मुनाफे के बजाय घाटे का सौदा बन गया है। मजबूरन किसान अपनी मेहनत से उगाई गई फसल को मंडी ले जाने के बजाय खड़ी फसल में ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर रहे हैं।
किसान वेद प्रकाश, राम गाेपाल और कृष्ण ने बताया कि एक एकड़ में गेंदा फूल उगाने पर पौध, खाद, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर लगभग 50 हजार रुपये की लागत आती है। जब अक्टूबर माह में फसल की रोपाई की थी तो उन्हें उम्मीद थी कि शादियों के सीजन में मांग बढ़ने से उन्हें अच्छा मुनाफा होगा, लेकिन शहर की मंडियों में गेंदा फूल की मांग कम है। ऐसे में उन्हें प्रति किलो का भाव 10 रुपये से 20 रुपये प्रति किलो के बीच ही मिल रहा है। जबकि फूलों की तुड़वाई की मजदूरी प्रति एकड़ 5 रुपये किलो है। इस भाव पर फूल बेचना तो दूर, खेत से तुड़वाई की मजदूरी भी नहीं निकल पा रही है।
अनुदान का अभाव
फूलों की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि उन्हें बागवानी विभाग से कोई अनुदान नहीं मिला। यदि सरकार की ओर से समय पर आर्थिक सहायता या संरक्षित बाजार की सुविधा मिलती, तो उन्हें फसल नष्ट करने की नौबत नहीं आती। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन अब तो फसल पर हुआ खर्च निकाल पानी मुश्किल हो गया है।
दिल्ली-जयपुर की दूरी और भाड़े का बोझ
शहर की मंडी में फूलों की प्रति दिन की लागत मात्र दो क्विंटल है। ऐसे में किसान अपनी उपज को लेकर दिल्ली की गाजीपुर मंडी या जयपुर जैसी बड़ी मंडियों का रुख करते हैं। लेकिन ट्रेन की सुविधा नहीं होने के कारण दिल्ली या जयपुर तक माल ले जाने का भाड़ा ही इतना अधिक हो जाता है कि वहां बेचने से उन्हें नुकसान ही होता है। वहीं आढ़ती अपनी मनमर्जी के अनुसार फूलों के भाव लगाता है। जिससे उनका परिवहन का खर्च भी पूरा नहीं होता।
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