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Kisan Diwas (Farmers' Day) celebration was organized at HAU, Hisar, on the birth anniversary of former Prime Minister Chaudhary Charan Singh.
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हिसार एचएयू में पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह की जयंती पर किसान दिवस समारोह का आयोजन
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने कहा कि हर एक किसान को उद्यमी बनना होगा। उसे खेती के साथ एक सहायक व्यवसाय अपनाना होगा। जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। दलहनी-तहलनी फसलों को लगा कर हम आय बढ़ाने के साथ देश की तरक्की में भी सहयोग दे सकते हैं।किसानों को प्राकृतिक खेती को अपनाना चाहिए।
एचएयू में पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह की जयंती पर आयोजित किसान दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए एचएयू कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने कहा कि किसानों को आय बढ़ाने में विश्वविद्यालय लगातार प्रयासरत है। हरियाणा राज्य गठन के समय 1966-67 के दौरान खाद्यान्न मात्र 25.92 लाख टन था। जो अब आठ गुणा बढ़कर 200 लाख टन हो गया है। गेहूं का उत्पादन में 6 गुणा, चावल 8 में गुणा, कपास में 3 गुणा एवं तिलहनी फसलों का उत्पादन 5 गुणा बढ़ा है। इस उपलब्धि में सबसे बड़ा योगदान किसान का है। एचएयू ने भी इस विकास यात्रा में अहम भूमिका निभाई है।
एक एकड़ में 8 लाख एकड़ पानी बचाई किस्म
विश्वविद्यालय ने कम पानी में अधिक पैदावार देने वाली गेहूं की किस्म 1402 विकसित की है। जो दो पानी में ही 50 मण प्रति एकड़ से अधिक उत्पादन देगी। इसमें खाद की जरूरत भी 25 प्रतिशत तक कम होगी। हम एक एकड़ में छह पानी लगाते हैं। एक एकड़ में 2 ईंच पानी लगाने पर 2 लाख लीटर पानी लगता है। हम चार पानी बचा लिए तो एक एकड़ में 8 लाख लीटर पानी बचा सकते हैं। गेहूं की डब्ल्यूएच 1309 को हम जनवरी के पहले सप्ताह तक लगा सकते हैं।
बाजरे की नई किस्मों से मिलेगा ज्यादा आयरन...
बाजरा की बायोफोर्टिफाइड किस्में भी विकसित की हैं। जिनमें लौह तत्व एवं जस्ते की भरपूर मात्रा है। यूनिवर्सिटी की बाजरा की किस्म एचएसबी 299, एचएसबी 311 में आयरन की मात्रा काफी अधिक है। यह किस्में पोषण के नजरिए से काफी फायेदमंद है।महिलाएं बाजरा सहित अन्य मोटे अनाज के बिस्किट बना रही हैं। सरसों की आरएच 725, आरएच 375,आरएच 1706 में तेल की मात्रा अधिक है।
किसानों को आय बढ़ाने के लिए दलहनी फसलों, औषधीय पौधे, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, सब्जियों, फलों, फूलों की खेती, जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती को भी अपनाना चाहिए। प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों का रूझान बढ़ रहा है।
उत्पादन को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों को अपनाना होगा। पशुओं के वेस्ट गोबर, कृषि के वेस्ट को खेत में ही उपयोग करना होगा। ऐसा करने से फसलों का उत्पादन बढ़ेगा। उसकी गुणवत्ता भी अच्छी होगी। अगर किसान अपने खेत में मधुमक्खी पालन करता है तो उसका उत्पादन 15 से 20 तक बढ़ जाता है।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करेंगे हमारे वैज्ञानिक...
जलवायु परिवर्तन भी आने वाले समय में कृषि के लिए समस्याएं उत्पन्न करने वाला हो सकता है। जो हमारे खाद्यान्न उत्पादन को भी प्रभावित करेंगी। बढ़ती आबादी व बदलते जलवायु में पैदावार को किस तरह बढ़ाएं यह सब उपाय करने की जिम्मेदारी हमारे कृषि वैज्ञानिकों के कंधों पर है। उच्च ताप रोधी किस्में विकसित करने के अलावा अधिक पैदावार देने वाली किस्में भी विकसित की जा रही है।
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ बलवान सिंह मंडल ने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र के जरिए हम एचएयू की विकसित नवीनतम कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचा रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड (नैब) से ए+ ग्रेड, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) 2024 में इस विश्वविद्यालय ने राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में पांचवा स्थान हासिल करके उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके. पाहुजा ने सभी का धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया।
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