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school principal will have to give full responsibility of the school buildings in Hisar, otherwise a case will be filed
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हिसार में स्कूलों के भवनों की स्कूल प्राचार्य को देनी होगी पूरी जिम्मेदारी, नहीं तो दर्ज हो केस
पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिंह ने कहा कि स्कूलों के भवनों की पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्राचार्य को देनी होगी। स्कूल भवनों को लेकर प्रक्रिया बहुत लंबी और जटिल होने के कारण काम नहीं हो पाते। स्कूल के एक कमरे को कंडम कराने में दिन नहीं महीने और साल तक लग जाते हैं। किसी तरह का हादसा होने पर हत्या का केस दर्ज होना चाहिए। सभी शिक्षा अधिकारियों पर हत्या का केस दर्ज होना चाहिए। अदालत को भी बेहद सख्ती से काम करना चाहिए।
अमर उजाला की ओर से कैसी है पाठशाला के तहत प्रदेश भर के स्कूलों को लेकर अभियान चलाया गया। जिसमें 10 दिन में स्कूलाें के हालातों को उजागर किया गया। शिक्षा विभाग ने कंडम स्कूलों को लेकर काम शुरु किया है। अमर उजाला कार्यालय में वीरवार को संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें शिक्षक, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी, पूर्व सैन्य अधिकारी तथा अभिभावक ने हिस्सा ने लिया। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिंह ने कहा कि देश में मानव जीवन को लेकर गंभीरता नहीं है। एक बाद हादसा होने पर हम कुछ देर के लिए जागते हैं, शौर मचाते हैं तथा इसके बाद व्यवस्था फिर उसी पटरी पर चली जाती है। हर एक व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सभी स्कूलों का हर साल शिक्षा सत्र शुरु होने से पहले ऑडिट होना चाहिए। जब तक प्राचार्य को जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी तब तक इसका समाधान नहीं हो सकेगा। सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। कमरे बनाने के लिए बजट तो जारी हो जाता है लेकिन उनको गिराने की प्रक्रिया कई साल तक लटकी रहती है।
अर्थशास्त्र के प्रवक्ता सुरेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार बजट तो देती है उसमें कई तरह की शर्त होती हैं। नियम व शर्ताें के कारण काम नहीं हो पाते। सरकार को निचले स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों को छूट देनी चाहिए। प्राचार्य को भी किसी तरह की पावर नहीं है। इस कारण काम में बहुत देरी होती है।
भूगोल विभाग के प्रवक्ता राजबीर सिंह ने कहा कि अकेला प्राचार्य कुछ नहीं कर सकता। सरकारी विभाग पर काम काफी देरी होती है। हर विभाग अपने तय समय पर काम करे तो इस समस्या का समाधान हो सकता है। प्राचार्य के पास केवल 20 लाख रुपये से कम के कार्य कराने की शक्ति है। कमरे बनाने के लिए लाखों का बजट होता है। जिसमें काम लोक निर्माण विभाग से कराना होता है।
अभिभावक कमल मोहन ने कहा कि सरकारी स्कूल सारे खराब नहीं हैं। जहां प्राचार्य अच्छे हों वहां काम अच्छा होता है। हिसार के जहाजपुल स्कूल का भवन आप देखें। जो निजी स्कूलों से भी शानदार बना हुआ है। दरअसल जहां ईमानदार अधिकारी होते हैं वहां काम अच्छा होता है।
प्रवक्ता अशोक कुमार वशिष्ठ ने कहा कि सरकारी स्कूलों में भी कमी हैं, निजी स्कूलों में भी कमी है। हर साल विद्यालयों का आडिट होना चाहिए। डेटा का प्रयोग कर सूची बनाकर जर्जर स्कूलों की जांच होनी चाहिए। कंडम स्कूल भवनों को गिरा कर काम करना चाहिए। स्कूलों के मुखिया से लिस्ट लेकर उसे कंडम घोषित करने के लिए एक तय समय होना चाहिए।
कर्नल हरी सिंह ने कहा कि स्कूल भवन गिरने पर सभी जिम्मेदार हैं। स्कूल में मूलभूत सुविधाओं, सुरक्षा को लेकर सभी तरह की जांच हर साल होनी चाहिए। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को इस पर काम करना चाहिए। एसएमएसी को भी शक्तियां देनी चाहिएं। जिससे स्कूल के काम को पूरा कराया जा सके।
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