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Haryana: The secret of Kapalmochan – The truth behind the strange ritual of worship and beating with shoes!
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Haryana: कपालमोचन का रहस्य – पूजा और जूतों की अजीब रस्म का सच!
Video Desk Amar Ujala Dot com Published by: चंद्रप्रकाश नीरज Updated Mon, 03 Nov 2025 06:29 PM IST
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भारत रहस्यों और अनोखी परंपराओं से भरा हुआ देश है। यहां के लोग अपनी संस्कृति, रहन-सहन और परंपराओं के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। ऐसी ही एक अनोखी परंपरा कपालमोचन के पास गांव संधाय के जंगलों में मौजूद है। इस परंपरा के तहत लोग एक विशेष किले पर जूते और चप्पल मारते हैं और गालियां भी देते हैं। लोग दूर-दूर से पैदल या सवारी गाड़ियों के जरिए यहां आते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह परंपरा मुख्य रूप से मेले के दौरान ही देखने को मिलती है; अन्य समय में यह क्षेत्र वीरान रहता है। कपालमोचन के पास स्थित इस जगह पर एक गुरुद्वारा भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। लोगों का मानना है कि गुरु गोबिंद सिंह भंगियानी ने अपने युद्ध जीतने के बाद कपालमोचन में 52 दिन रुके थे। यहीं उन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र को साफ किया और 40 दिन तक रात को तपस्या की। इसके कारण इस जंगल क्षेत्र का नाम सिंधू वन रखा गया।यह परंपरा और गुरुद्वारे का इतिहास स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रद्धालु गुरुद्वारे में शीष झुकाते हैं और राजा जरासंध के टीले पर अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए जूते मारते हैं।
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