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Bilaspur: झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल बोले- हाईकोर्ट ने भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम-2024 किया खारिज
हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायालय के फैसले के बाद नया मोड़ ले चुका है। हाईकोर्ट ने इस अधिनियम को खारिज कर दिया है, जिससे अनुबंध कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, वहीं प्रदेश सरकार को बड़ा झटका लगा है। झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने कहा कि उन्होंने इस संवेदनशील विषय को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने सरकार को आगाह करते हुए कहा था कि कर्मचारियों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए और मनमाने निर्णय अदालत में चुनौती का कारण बन सकते हैं। विधायक ने सुप्रीम कोर्ट और महाराष्ट्र से जुड़े एक मामले का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया था कि किसी भी जूनियर कर्मचारी को सीनियर से अधिक लाभ नहीं दिया जा सकता। उन्होंने यह भी चेताया था कि इस तरह के प्रावधान न्यायिक चुनौती का सामना कर सकते हैं। कर्मचारियों के विरोध और आशंकाओं के बीच हाईकोर्ट द्वारा अधिनियम को खारिज किए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि इस मुद्दे पर सरकार का निर्णय न्यायिक कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया। कोर्ट का यह फैसला अनुबंध कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। यह अधिनियम दिसंबर 2024 में पारित हुआ था और फरवरी 2025 से लागू किया गया था। इसके तहत दिसंबर 2003 या उसके बाद नियुक्त अनुबंध कर्मचारियों के लाभों को पूर्वव्यापी प्रभाव से सीमित कर दिया गया था। खासतौर पर वरिष्ठता का लाभ नियुक्ति तिथि की बजाय नियमितीकरण की तिथि से देने का प्रावधान किया गया था, जिसका कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया था। इस प्रावधान के चलते कर्मचारियों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही थी, जिसका सीधा असर उनके वेतनमान और पदोन्नति पर पड़ रहा था। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने इसे उनके हितों पर कुठाराघात बताते हुए विरोध जताया था।
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