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Bilaspur Natural Farming Transforms the Life of Ravi Dutt, a Farmer from Dhamtal; Rising Costs and Declining Soil Fertility Shift His Perspective
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Bilaspur: प्राकृतिक खेती से बदली धमतल के किसान रवि दत्त की जिंदगी, बढ़ती लागत और घटती उर्वरता ने बदला सोचने का नजरिया
जुखाला क्षेत्र के गांव धमतल निवासी 47 वर्ष के किसान रवि दत्त ने प्राकृतिक खेती अपनाकर अपनी आजीविका को नई दिशा दी है। एक समय रासायनिक खेती पर निर्भर रहने वाले रवि दत्त आज प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से बेहतर उत्पादन कर रहे हैं और उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनकी सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। रवि दत्त ने बताया कि पहले वे भी पारंपरिक तरीके से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कर खेती करते थे। लेकिन समय के साथ खेती की लागत लगातार बढ़ती गई और मिट्टी की उर्वरता में गिरावट आने लगी। उत्पादन तो मिल रहा था, लेकिन मुनाफा कम होता जा रहा था। इसी समस्या ने उन्हें खेती के वैकल्पिक तरीकों के बारे में सोचने पर मजबूर किया। वर्ष 2018 में रवि दत्त ने प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी प्राप्त की और इसे अपनाने का निर्णय लिया। शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इस पद्धति को समझा और अपने खेतों में लागू किया। आज वे पूरी तरह प्राकृतिक खेती पर आधारित मॉडल पर कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में रवि दत्त अपने खेतों में मक्की, गेहूं, कोदरा, विभिन्न प्रकार की दालें, मटर, टमाटर सहित अन्य सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। फसल विविधता के कारण उन्हें साल भर आय के स्रोत मिलते हैं और किसी एक फसल पर निर्भरता भी कम हुई है। इससे जोखिम भी घटा है और आमदनी स्थिर बनी रहती है। प्राकृतिक खेती अपनाने के साथ ही रवि दत्त ने वर्ष 2018 में देसी नस्ल की गिर गाय भी पाली। वर्तमान में उनके पास दो बड़ी गायें और एक बछड़ी है। वे बताते हैं कि देसी गाय के गोबर और गौमूत्र से तैयार जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य प्राकृतिक घोल उनकी खेती की रीढ़ हैं। इनका उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता में सुधार हुआ है, फसलों की गुणवत्ता बेहतर हुई है और रासायनिक इनपुट की आवश्यकता समाप्त हो गई है।
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