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Mandi: कुंतभयो झील के बढ़ते जलस्तर से खतरे की आहट, चिंता में ग्रामीण
रिवालसर की प्राकृतिक झील के बाद अब यहां से कुछ दूरी पर स्थित एक अन्य कुंतभयो प्राकृतिक झील भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने की तरफ अग्रसर होती हुई नजर आ रही है। तीन धर्मों की संगम स्थली के नाम से प्रसिद्ध रिवालसर की प्राकृतिक झील पिछले लंबे समय से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। लगातार बढ़ती गाद की मात्रा और कम होती गहराई इसका कारण माना जा रहा है। इस झील के अस्तित्व को बचाने के लिए अभी तक तो कोई खास प्रयास होते हुए नजर नहीं आए, लेकिन इससे कुछ ही दूरी पर स्थित एक अन्य प्राकृतिक झील भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर होती हुई नजर आ रही है। रिवालसर से महज 7 किमी की दूरी पर स्थित प्राकृतिक कुंतभयो झील है। वर्ष 2023 और 2025 की बरसात में इस झील का जलस्तर इतना अधिक बढ़ गया कि लोगों को दूसरे स्थानों पर जाकर शरण लेनी पड़ी। बरसात थमने के बाद जलस्तर तो घटा, लेकिन उस स्तर तक नहीं आया जो सामान्यतः होता था। झील का जलस्तर सामान्य से अधिक ही रह रहा है। आलम यह है कि झील का जलस्तर साथ लगते घरों के काफी नजदीक तक पहुंच गया है, जोकि स्थानीय लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। स्थानीय निवासी प्रेम कुमार और आत्मा राम शर्मा सहित अन्यों का मानना है कि झील में अब धीरे-धीरे गाद जमा होने लग गई है, जिस कारण यह जलस्तर बढ़ता जा रहा है। उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से इस दिशा में समय रहते प्रभावी कदम उठाने की गुहार लगाई है ताकि भविष्य में किसी भी खतरे या अनहोनी से बचा जा सके। उधर, सुकेत वन मंडल के उप अरण्यपाल राकेश कटोच ने बताया कि झील का जलस्तर बढ़ने को लेकर इसकी वैज्ञानिक जांच की जरूरत है, जिसके बाद ही इस विषय पर स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा। दंत कथाओं के अनुसार कुंतभयो झील का पानी अर्जुन ने तीर मारकर निकाला था और इसी पानी को पीकर माता कुंती ने अपनी प्यास बुझाई थी। बताया जाता है कि पांडव अपने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में भी आए थे। जब कुंती माता को प्यास लगी तो यहां पानी का कोई साधन नहीं था। तब अर्जुन ने तीर मारकर यहां पानी निकाला था जिससे यह झील बनी। इसलिए इस झील को कुंतभयो झील कहा जाता है। यहां माता कुंती का मंदिर भी मौजूद है। इस पूरे क्षेत्र में इस तरह की 7 प्राकृतिक झीलें हैं।
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