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Mandi: बल्ह एयरपोर्ट प्रस्ताव का विरोध तेज, संघर्ष समिति ने जाहू में निर्माण की मांग उठाई
उपजाऊ बहु-फसली जमीन के अधिग्रहण और संभावित बड़े पैमाने पर विस्थापन के विरोध में बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति ने प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना के खिलाफ मोर्चा तेज कर दिया है। समिति के अध्यक्ष प्रेमचंद चौधरी और सचिव नंद लाल वर्मा की ओर से जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि तकनीकी सर्वे के आधार पर एयरपोर्ट के लिए जाहू क्षेत्र अधिक उपयुक्त पाया गया है, इसलिए बल्ह क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से किसान लगातार सरकार से आग्रह करते रहे हैं कि एयरपोर्ट का निर्माण गैर-उपजाऊ भूमि पर किया जाए, ताकि बल्ह क्षेत्र के किसानों को विस्थापन से बचाया जा सके। समिति का आरोप है कि किसानों को विश्वास में लिए बिना बहु-फसली उपजाऊ भूमि पर परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि रिपोर्ट में मंडी और हमीरपुर के बीच स्थित जाहू क्षेत्र में अधिकतर बंजर या कम उपजाऊ भूमि उपलब्ध होने और विस्थापन कम होने की बात कही गई है। चौधरी और वर्मा ने कहा कि बल्ह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से कृषि प्रधान रहा है और यहां की खेती आधारित अर्थव्यवस्था लगभग 400 करोड़ रुपये की है। प्रस्तावित अधिग्रहण से करीब 2500 परिवारों और हजारों कृषि मजदूरों की आजीविका प्रभावित होगी। नकदी फसल उत्पादन, डेयरी, पशुपालन और अन्य गतिविधियों से जुड़े लगभग 12000 लोगों के बेरोजगार होने की आशंका जताई गई है। समिति ने यह भी कहा कि प्रस्तावित क्षेत्र बाढ़ प्रभावित घोषित है और अतीत में कई बार भारी नुकसान झेल चुका है। ऐसे में रनवे निर्माण के लिए अतिरिक्त संरचनात्मक बदलावों से और भूमि अधिग्रहण बढ़ेगा। साथ ही सिंचाई और पेयजल योजनाओं, आवासीय ढांचे, सड़क नेटवर्क तथा पर्यावरण पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण के दायरे में आने वाले छह गांवों में बड़ी आबादी सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की है, जिनके भूमिहीन होने का खतरा है। समिति का आरोप है कि पुनर्वास नीति स्पष्ट नहीं है और मुआवजा दरें इतनी कम हैं कि प्रभावित किसान कहीं अन्यत्र उपजाऊ भूमि नहीं खरीद सकते। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि निकटवर्ती हवाई अड्डों की उपलब्धता और भौगोलिक कठिनाइयों को देखते हुए परियोजना की व्यवहार्यता पर पुनर्विचार होना चाहिए। उनका दावा है कि जाहू या सरकाघाट क्षेत्र में कम लागत और कम विस्थापन के साथ लंबा रनवे संभव है। अध्यक्ष प्रेमचंद चौधरी और सचिव नन्द लाल वर्मा ने प्रशासन से मांग की है कि सामाजिक प्रभाव रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करते हुए तकनीकी सर्वे के आधार पर वैकल्पिक स्थल पर एयरपोर्ट निर्माण पर विचार किया जाए और वर्तमान अधिग्रहण प्रक्रिया को रोका जाए। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन, रोजगार और सामाजिक संरचना की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
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