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Who is the grand alliance planning to nominate for the post of vice president?
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उपराष्ट्रपति पद पर किसे उम्मीदवार बनाने की तैयारी में है महागठबंधन?
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Sat, 26 Jul 2025 10:15 AM IST
देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने भारतीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जब तक उनके इस्तीफे के पीछे की वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक चर्चाओं का दौर थमने वाला नहीं है। धनखड़ ने औपचारिक रूप से स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में उनके इस फैसले को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
उपराष्ट्रपति पद अब रिक्त हो चुका है और ऐसे में देश को नया उपराष्ट्रपति मिलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी कड़ी में शुक्रवार को चुनाव आयोग ने नई नियुक्तियों और जिम्मेदारियों की घोषणा करते हुए यह संकेत दे दिया है कि उपराष्ट्रपति चुनाव का कार्यक्रम जल्द ही घोषित किया जाएगा।
निर्वाचन आयोग ने इस बार राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी को उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया है। इसके अलावा दो सहायक निर्वाचन अधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है। संयुक्त सचिव गरिमा जैन और निदेशक विजय कुमार इस चुनाव प्रक्रिया में पीसी मोदी की सहायता करेंगे।
निर्वाचन आयोग ने यह नियुक्तियां राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव नियम, 1974 के तहत की हैं। आयोग के अनुसार, इस चुनाव की जिम्मेदारी बारी-बारी से लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों को दी जाती है। पिछले उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा महासचिव ने यह भूमिका निभाई थी, इस बार बारी राज्यसभा महासचिव की है।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक, चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कानून एवं न्याय मंत्रालय से परामर्श और राज्यसभा उपसभापति की सहमति के बाद बहुत जल्द की जाएगी।
हालांकि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने त्यागपत्र में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, लेकिन विपक्ष इसे एक राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी INDIA गठबंधन का मानना है कि धनखड़ ने मौजूदा केंद्र सरकार के कार्यशैली से असहमति के चलते पद छोड़ा है।
यही कारण है कि विपक्ष इस मौके को राजनीतिक रूप से भुनाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि INDIA गठबंधन एक बार फिर संयुक्त उम्मीदवार उतारने पर मंथन कर रहा है। पिछली बार भी मार्गरेट अल्वा को विपक्ष की तरफ से संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर उतारा गया था, हालांकि वह चुनाव हार गई थीं।
संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित और मनोनीत सदस्यों द्वारा किया जाता है। इस समय दोनों सदनों में कुल 782 सदस्य हैं। उपराष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 392 वोटों की आवश्यकता होगी।
यदि वर्तमान राजनीतिक आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा और उसके सहयोगियों के पास स्पष्ट बढ़त है। लोकसभा में भाजपा गठबंधन के पास 293 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में एनडीए के पास 130 सांसद हैं। यानी कुल मिलाकर एनडीए के पास लगभग 423 सांसद हैं। वहीं विपक्षी INDIA गठबंधन के पास सिर्फ 79 राज्यसभा सांसद और 140 के करीब लोकसभा सांसद हैं। यानी गणित के लिहाज से भाजपा उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
भाजपा अब उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम पर मंथन शुरू करने जा रही है। सूत्रों की मानें तो इस बार पार्टी कोई ‘प्रयोगधर्मी’ फैसला नहीं लेना चाहती। पार्टी का रुख इस बार संगठनात्मक मजबूती और वैचारिक प्रतिबद्धता की ओर ज्यादा होगा।
इसी बीच चर्चा यह भी है कि जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ सांसद हरिवंश नारायण सिंह का नाम संभावित उम्मीदवारों की सूची में सबसे आगे है। हरिवंश अभी तक दो बार राज्यसभा के उपसभापति रह चुके हैं और एनडीए की ओर से सत्ताधारी दल का भरोसा भी उन्होंने अपने 7 साल के कार्यकाल में जीता है।
हालांकि, हरिवंश की उम्मीदवारी पर अंतिम निर्णय अब भाजपा और सहयोगी दलों के बीच होने वाली बैठकों में लिया जाएगा।
अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग की ओर हैं, जो अगले कुछ दिनों में उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। इसके बाद राजनीतिक पार्टियों की अंदरूनी रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और वोटों के गणित पर नजर रहेगी।
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