आगर मालवा जिले में भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे केवल सरकारी ज़मीन ही नहीं, बल्कि नदियों को भी निगलने की कोशिश कर रहे हैं। ताजा मामला जिला मुख्यालय के पास सामने आया है, जहां कुछ रसूखदार भूमाफियाओं ने कॉलोनी विकसित करने के नाम पर न सिर्फ अपनी भूमि को समतल किया, बल्कि बगल से बहने वाली ऐतिहासिक बाणगंगा नदी पर भी अतिक्रमण कर उसे पाटने की कोशिश की।
जानकारी के अनुसार, इंदौर-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर आगर से सुसनेर मार्ग की ओर लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर कुछ भूमाफियाओं द्वारा एक कॉलोनी विकसित की जा रही थी। इस कॉलोनी की सीमाएं बाणगंगा नदी से लगती हैं। कॉलोनी की भूमि को समतल करते हुए इन लोगों ने नदी के बड़े हिस्से पर भी कब्जा कर लिया। नदी के भीतर सीमेंट के पाइप बिछाकर जल निकासी की आड़ में नदी को पाट दिया गया और उसके ऊपर मुरम (लाल मिट्टी) डालकर समतल ज़मीन बना दी गई।
इस गंभीर मामले की जानकारी जैसे ही प्रशासन को लगी, प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। शुक्रवार सुबह एसडीएम किरण वरवड़े, तहसीलदार आलोक वर्मा और पटवारी महेश कुमार मालवीय ने अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। जब अधिकारियों ने देखा कि नदी को पाइप डालकर पूरी तरह छिपा दिया गया है, तो वे भी चकित रह गए। अतिक्रमण की यह स्थिति ऐसी थी कि जैसे वहां कभी कोई नदी थी ही नहीं।
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प्रशासन की कार्रवाई शाम तक जारी रही। इस दौरान नदी पर डाली गई मिट्टी को हटाकर उसे पुनः पूर्व स्थिति में लाया गया। गंभीर परिणाम हो सकते थे। अगर समय रहते यह अतिक्रमण नहीं हटाया जाता, तो आगामी बारिश में बाणगंगा नदी के जल का प्राकृतिक निकास रुक जाता। इससे नदी विकराल रूप ले सकती थी, और पास से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी बाढ़ का खतरा मंडरा सकता था। प्रशासन ने अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे भी ऐसी किसी भी गतिविधि पर सख्ती से कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।