मध्यप्रदेश के बुराहनपुर शहर में जिला प्रशासन के द्वारा जिले की सभी निजी स्कूल संचालकों की एक बैठक बुलाई गई। जिला कलेक्टर द्वारा ली गई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य, जिले में स्कूल बसों को सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित और सावधानी पूर्वक रूप से संचालित करवाया जाना था। संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में बुलाई गई इस बैठक के दौरान कलेक्टर सिंह ने स्कूल संचालकों को सख्त हिदायत देते हुए निर्देशित किया कि नियमों का पालन नहीं करने पर संबंधित के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्हें इसको लेकर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों एवं टीचर सहित अभिभावक से भी मीटिंग कर फीडबैक अवश्य लेना होगा। इसके साथ ही जिला कलेक्टर हर्ष सिंह ने जिले के सभी स्कूल संचालकों को यह भी निर्देशित किया है कि वे अपने स्कूलों की बसों के संचालन, प्रबंधन और परिवहन नियम के पालन को लेकर प्रत्येक माह जिला शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट भी प्रस्तुत करेंगे। साथ ही उनके द्वारा बस परिवहन के नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करवाया जाएगा।
बुराहनपुर जिले की नेपानगर तहसील में एक दिन पहले ही एक निजी स्कूल की बच्चों से भरी बस पलटने की घटना के बाद जिला प्रशासन अब सख्ती के मूड में नजर आ रहा है। गुरुवार को जिला कलेक्टर ने उस दुर्घटना को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को हादसे के जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को निर्देशित किया। साथ ही जिले के सभी स्कूल संचालकों को बुलाकर एक बैठक भी ली गई। इस बैठक में जिला कलेक्टर हर्ष सिंह ने अपर कलेक्टर एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को परिवहन विभाग के साथ मिलकर संयुक्त रूप से बसों की आकस्मिक जांच करने की बात कही। साथ ही उन्होंने निर्देशित किया कि स्कूल संचालकों द्वारा नियुक्त ट्रांसपोर्ट मैनेजरों की प्रतिमाह बैठक अनिवार्य रूप से करना सुनिश्चित किया जाएगा।
स्कूल संचालक करें ट्रांसपोर्टर मैनेजर की नियुक्ति
वहीं, कलेक्टर ने बैठक में कहा कि सभी स्कूली बसों में जीपीएस एवं सीसीटीवी कैमरे चालू अवस्था में रहें। साथ ही निर्धारित मानक के अनुसार गति नियंत्रक यंत्र भी होना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि परिवहन नियम अनुसार स्कूल बस में अग्निशमन यंत्र की सुविधा हो। स्कूल बस में स्कूल का नाम एवं दूरभाष क्रमांक अंकित रहे। प्रवेश एवं निर्गम हेतु अलग-अलग दो दरवाजे रहें। साथ ही जिन स्कूलों में छात्रायें होती हैं, वहां पर एक शिक्षित परिचारिका हो। वहीं स्कूल बस में शिक्षित-प्रशिक्षित परिचालक होना भी अनिवार्य है। जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार स्कूल बस के चालक के पास कम से कम पांच वर्ष पुराना भारी वाहन चलाने का अनुभव हो। स्कूल संचालकों द्वारा एक ट्रांसपोर्टर मैनेजर की नियुक्ति होना चाहिए, जो बच्चों की सुरक्षा हेतु उत्तरदायी रहेगा।
स्कूल बसों के लिए ये रहेंगे नियम
जिला कलेक्टर ने निर्देशित किया कि स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए। स्कूल बस के आगे एवं पीछे के भाग पर “स्कूल बस” लिखा होना चाहिए। यदि अनुबंधित बस हो तो उस बस पर “ऑन स्कूल ड्यूटी” लिखा होना चाहिए । स्कूल बस में प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड बॉक्स होना अनिवार्य है। स्कूल बस में निर्धारित मानक के अनुसार गति नियंत्रक (एसएलडी) लगा होना आवश्यक है। स्कूल बस में खिडकियों पर (हॉरिजॉन्टल) ग्रिल होना अनिवार्य है। बसों के दरवाजों पर लगे ताले ठीक स्थिति में हों। जिला कलेक्टर ने बैठक में कहा कि इन सभी नियमों का पालन करवाया जाए।