देश भर में शनिवार को हनुमान जयंती का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। ऐसे में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित एक अनोखे मंदिर की भी चर्चा है। जहां हनुमानजी बगैर छत के ही विराजमान हैं। यह मंदिर प्रदेश के बुरहानपुर नगर से करीब 70 किलोमीटर दूर सिरसाडा गांव में स्थित है। मान्यता है कि इस मंदिर में छत डालने की कोशिशें तो कई बार हुईं, लेकिन हर बार वो छत या तो टूट गई या हवा में उड़ गई। इसलिए इस चमत्कारी मंदिर में आज के दिन आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है और दूरदराज के क्षेत्रों से भक्त यहां आकर अपना शीश नवाते हैं।
बुरहानपुर जिले के सिरसाडा गांव के एक अनोखे हनुमान में आज के दिन बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे हुए हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार, यह मंदिर करीब 400 साल पुराना है। जब यहां हनुमानजी स्वयं प्रकट हुए थे। बताया जाता है कि यह मूर्ति सूर्यमुखी है। यहां पहुंचे भक्त सिंदूर, तेल और आंकड़े के पत्तों के साथ नारियल चढ़ाकर हनुमानजी के दर्शन करते हैं। इस मंदिर में कोई छत नहीं है। यहां जब भी किसी ने छत डालने की कोशिश की, तब वह छत या तो गिर गई या आंधी-तूफान में उड़ गई और इसी मान्यता के चलते यहां हुए नए निर्माण में भी मंदिर की छत नहीं डाली गई है। बता दें कि यह मंदिर पहले घने जंगल में थी। लेकिन धीरे-धीरे इसका विस्तार हुआ। दीवारें ऊंची हुईं पर जैसे-जैसे मंदिर की दीवारें बढ़ीं, वैसे-वैसे मूर्ति की ऊंचाई भी बढ़ती चली गई। यहां पहुंचे भक्त इसे हनुमानजी का चमत्कार मानते हैं।
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यहां हर शनिवार और मंगलवार को 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर में अखंड ज्योत भी जलती रहती है और जो भी मन्नत मांगी जाएं, वह पूरी होती है। भक्त यहां दालबाटी का भोग अर्पित करते हैं। यहां का पुजारी परिवार पीढ़ियों से मंदिर में पूजा अर्चना कर रहा है। इस मंदिर के इतिहास से जुड़ी कहानियां बताती हैं कि जब भी किसी ने छत डालने की कोशिश की, यहां कोई न कोई अनहोनी घटित हुई है।
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बताया जाता है कि अंतिम बार जब इसी गांव के नगरसेठ अग्रवाल यहां छत डालने लगे तो वे गंभीर रूप से बीमार हो गए, जिसके बाद से माना गया कि यहां छत न बनने देना ही हनुमानजी की इच्छा है। इन्हीं सब बातों के चलते सिरसाडा का यह हनुमान मंदिर केवल एक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि चमत्कार और श्रद्धा का जीवंत उदाहरण माना जाता है। जो भी यहां आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता।