दमोह जिले के हटा वन परिक्षेत्र अंतर्गत रजपुरा और आसपास के जंगलों में बाघ की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। पिछले करीब 10-12 दिनों से क्षेत्र में बाघ के लगातार विचरण करने की सूचना मिल रही है। बाघ द्वारा पालतू मवेशियों का शिकार किए जाने के बाद ग्रामीणों ने खेतों में फसलों की रखवाली के लिए जाना कम कर दिया है। वहीं मवेशियों को जंगल में चराने ले जाने से भी लोग डर रहे हैं।
शनिवार को रजपुरा के जंगल में एक भैंस मृत अवस्था में मिली। ग्रामीणों के अनुसार, भैंस के शरीर पर बाघ के पंजों के निशान मिले हैं और उसके पिछले हिस्से को बाघ द्वारा खाए जाने के प्रमाण भी मिले। घटना की जानकारी फैलते ही आसपास के ग्रामीणों में और अधिक भय का माहौल बन गया। लोगों का कहना है कि बाघ गांव और खेतों के आसपास ही घूम रहा है, ऐसे में कभी भी ग्रामीणों का सामना बाघ से हो सकता है।
ग्रामीणों ने वन विभाग कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
लगातार मवेशियों के शिकार और बाघ की मौजूदगी से चिंतित ग्रामीण अभीर सिंह ठाकुर के नेतृत्व में वन विभाग कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने सहायक परिक्षेत्र अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने कहा कि बाघ के लगातार आसपास घूमने के कारण खेतों में जाना और मवेशियों को चराने ले जाना जोखिम भरा हो गया है। उन्होंने गांव और आसपास के जंगल क्षेत्र में वन अमले की नियमित गश्त बढ़ाने की भी मांग की, ताकि ग्रामीण और उनके मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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तीन से चार बाघों की मौजूदगी का ग्रामीणों का दावा
ग्रामीणों के अनुसार, सिर्फ रजपुरा के जंगल में ही नहीं, बल्कि मड़ियादो, कलकुआं और चोरइया क्षेत्र के जंगलों में भी बाघों की मौजूदगी के प्रमाण मिल रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इलाके में इस समय तीन से चार बाघ विचरण कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र से निकलकर बाघ मड़ियादो वन क्षेत्र और दमोह जिले के आसपास के जंगलों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। रजपुरा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से बाघ की लगातार गतिविधियां सामने आने के बाद ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
भैंस खोजने पहुंचे ग्रामीण तो जंगल में मिला शव
शनिवार दोपहर कुछ ग्रामीण अपनी भैंस को खोजने के लिए अन्य लोगों के साथ रजपुरा के जंगल पहुंचे थे। वहां भैंस मृत अवस्था में मिली। ग्रामीणों ने उसके शरीर पर बाघ के पंजों के निशान होने का दावा किया। शरीर के पिछले हिस्से को बाघ द्वारा खाए जाने के निशान भी बताए गए हैं। मवेशी के शिकार की घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों का कहना है कि बाघ अब जंगल में अपना क्षेत्र बना रहा है। उन्हें आशंका है कि खेतों में फसलों की रखवाली करने या मवेशियों को चराने के दौरान उनका सामना बाघ से हो सकता है।
वन विभाग ने लगाए ट्रैप कैमरे, निगरानी बढ़ाई
डीएफओ ईश्वर जरांडे ने बताया कि रजपुरा के जंगल में पिछले 10-12 दिनों से बाघ की मौजूदगी की जानकारी वन विभाग को मिल रही है। सुरक्षा को देखते हुए वन अमले को सतर्क रहने और क्षेत्र में निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जंगल में ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। वन विभाग की टीम बाघ की गतिविधियों और उसके मूवमेंट पर नजर रख रही है। डीएफओ ने कहा कि बाघ पर नजर रखी जा रही है।
मवेशियों के शिकार पर मिलेगा मुआवजा
डीएफओ ने यह भी बताया कि जिन ग्रामीणों के मवेशियों का बाघ द्वारा शिकार किया गया है, उनके प्रकरण तैयार किए जा रहे हैं। नियमानुसार कार्रवाई पूरी करने के बाद प्रभावित पशु मालिकों को जल्द मुआवजा दिया जाएगा। फिलहाल वन विभाग की टीम की निगरानी और ट्रैप कैमरों के जरिए बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

घटनास्थल का निरीक्षण करते वनकर्मी