दमोह के मिशन अस्पताल में सात हृदय रोगियों की मौत के आरोपी डॉक्टर नरेंद्र यादव उर्फ एन जॉन कैम की रिमांड पूरी होने के बाद जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने शुक्रवार को उसे न्यायालय में पेश किया था, जिसके बाद उसे मई तक के लिए जेल भेज दिया है। न्यायालय से बाहर निकलते ही सवाल पूछने पर आरोपी डॉक्टर ने कहा कि मुझे दमोह पुलिस और न्यायालय पर पूरा भरोसा है। जल्द ही सभी तथ्य बाहर आएंगे, निश्चिंत रहिए। डिग्री को लेकर किए गए सवाल पर उसने कहा कि जो बातें चल रही हैं, वह सब गलत हैं। उनका सब कुछ फेयर है, कोई भी गड़बड़ नहीं है। अपने परिवार को लेकर उसने कहा कि वह विदेश में है।
बता दें, पुलिस के द्वारा पहले आरोपी डॉक्टर की पांच दिन की रिमांड मांगी गई, फिर चार दिन और गुरुवार को एक दिन के लिए रिमांड पर लिया गया था। शुक्रवार को उसे न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय में पेश होने पर आरोपी डॉक्टर के अधिवक्ता सचिन नायक ने न्यायालय से मांग की थी कि अब पुलिस पूछताछ कर चुकी है। किसी भी तरह से प्रत्यक्ष रूप से डॉक्टर की आवश्यकता पुलिस को नहीं है, इसलिए उन्हें न्यायिक अभिरक्षा (ज्यूडिशियल कस्टडी) में भेजा जाए।
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शासन की ओर से मामले की पैरवी कर रहे एडीपीओ संजय रावत ने कहा कि न्यायालय ने आरोपी डॉक्टर को एक मई तक के लिए जेल भेज दिया है। डिफेंस लॉयर ने मांग की थी कि उनके क्लाइंट की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी की जाए और उन्हें मोबाइल चलाने की अनुमति दी जाए, ताकि हम उनसे फीस ले सकें। इस पर एडीपीओ ने तर्क दिया कि मोबाइल नहीं दिया जा सकता, क्योंकि वह जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। रही बात वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की तो उसके लिए जेल मैनुअल के हिसाब से न्यायालय तय करेगा कि पेशी किस तरह से होगी। गौरतलब है कि जेल जाने से पहले गुरुवार की रात आरोपी डॉक्टर कैम की तबीयत खराब होने पर उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। इलाज बाद पुलिस उसे अपने साथ ले गई थी।
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मिशन अस्पताल का लाइसेंस निलंबित
इस मामले में सीएमएचओ डॉ. मुकेश जैन द्वारा मिशन अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा कैथ लैब को भी सील कर दिया गया है। उन्हीं के आवेदन के आधार पर ही अस्पताल प्रबंधन समिति के नौ लोगों पर विभिन्न धाराओं में कोतवाली में केस दर्ज किया गया है।