डिंडोरी जिले की जनसुनवाई में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब एक वृद्ध दंपति अपने परिवार के साथ हो रहे कथित सामाजिक बहिष्कार की शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। दंपति ने आरोप लगाया कि बेटे के प्रेम विवाह की सजा पूरे परिवार को दी जा रही है। समाज से बाहर कर दिए जाने के कारण उनके अन्य बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है और अब न्याय की उम्मीद लेकर उन्होंने जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।
पीड़ित दंपति के अनुसार, उनके बेटे ने वर्ष 2022 में अपनी पसंद से दूसरे समाज की युवती से प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद समाज के कुछ लोगों ने पूरे परिवार का बहिष्कार कर दिया। उनका कहना है कि इस फैसले का असर केवल बेटे पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ा है। परिवार को सामाजिक कार्यक्रमों से दूर रखा जा रहा है और रिश्तेदार भी दूरी बनाने लगे हैं।
वृद्ध दंपति ने बताया कि उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा विवाह योग्य हैं, लेकिन सामाजिक बहिष्कार के कारण उनके रिश्ते तय नहीं हो पा रहे हैं। उनका आरोप है कि जब भी किसी परिवार से विवाह की बातचीत आगे बढ़ती है, समाज के कुछ लोग बीच में हस्तक्षेप कर रिश्ता तुड़वा देते हैं। इससे उनके बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है और पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
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दंपति ने जनसुनवाई में यह भी आरोप लगाया कि समाज में दोबारा शामिल करने के नाम पर उनसे 55 हजार रुपये की मांग की गई। उनका कहना है कि उन्होंने किसी तरह 35 हजार रुपये की व्यवस्था कर संबंधित लोगों को दे दिए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समाज में शामिल नहीं किया गया। अब उनसे शेष 20 हजार रुपये की मांग की जा रही है। परिवार का आरोप है कि राशि देने के बाद भी उन्हें सम्मानपूर्वक समाज में वापस लेने के बजाय लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।
वृद्ध दंपति ने कलेक्टर को दिए आवेदन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया, फिर भी उन्हें और उनके बच्चों को ऐसी सजा दी जा रही है, जिसका सबसे अधिक असर बेटियों के भविष्य पर पड़ रहा है।
जनसुनवाई में आवेदन प्राप्त होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से उन्हें न्याय मिलेगा और उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा। यह मामला एक बार फिर सामाजिक बहिष्कार जैसी प्रथाओं और उससे प्रभावित होने वाले परिवारों की पीड़ा को सामने लेकर आया है।