कृषि प्रधान क्षेत्र होने के बावजूद गुना में परम्परागत फसलें जैसे धनिया, टमाटर, सोयाबीन और गेहूं ही प्रमुखता से उगाई जाती हैं। हालांकि, अब जिले के छोटे और सीमांत किसान ऐसी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो कम लागत में अधिक मुनाफा दे सकें। इसी सोच के साथ गुना के किसान दंपती नीलम और प्रभाकर ने स्ट्रॉबेरी की खेती कर न केवल लाखों का मुनाफा कमाया, बल्कि अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती से हटकर नए तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
आमतौर पर स्ट्रॉबेरी की फसल ठंडे इलाकों में जैसे हिमाचल और उत्तराखंड में उगाई जाती है, लेकिन इस किसान दंपती ने इसे गुना की जलवायु में उगाकर नया उदाहरण पेश किया। उन्होंने सितम्बर के अंत में एक एकड़ भूमि में स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए और फरवरी के अंत तक लगभग एक टन उत्पादन हासिल किया। खर्चों को घटाने के बाद लगभग 4 लाख रुपये की शुद्ध आमदनी हुई।
नीलम प्रभाकर के अनुसार, एक पौधे से लगभग 500 ग्राम स्ट्रॉबेरी मिलती है और बाजार में इसकी कीमत 100 से 500 रुपये प्रति किलो तक होती है। गुना की स्ट्रॉबेरी डिब्बों में पैक होकर कानपुर और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में निर्यात की जा रही है। दंपती ने भविष्य में बड़े पैमाने पर इसकी खेती करने की योजना बनाई है।
नीलम ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की कुछ गर्म जलवायु के लिए उपयुक्त वैराइटीज भी हैं, जिन्हें गर्म क्षेत्रों में उगाकर अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। एक एकड़ में लगभग 20 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं, जो अच्छी आमदनी दे सकते हैं। उन्होंने इच्छुक किसानों को इस खेती के बारे में मार्गदर्शन देने का भी प्रस्ताव रखा है।
इस सफल प्रयास ने गुना के किसानों के लिए नई राहें खोली हैं और पारंपरिक खेती से अलग हटकर आधुनिक व लाभदायक कृषि की संभावनाओं को साकार किया है।