हरदा जिले की टिमरनी विधानसभा के आदिवासी अंचल में स्थित ग्राम पंचायत पटाल्दा के ग्राम बारानाला में शासन की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां पिछले दो वर्षों से प्राथमिक शाला कक्षा 1 से 5 तक का संचालन एक अस्थायी टिन के टप्परे में किया जा रहा है। आज़ादी के बाद वर्ष 2001 में शुरू हुई इस शाला का पक्का भवन क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था, लेकिन दो साल बीत जाने के बावजूद अब तक नए भवन का निर्माण नहीं हो सका है।
ग्राम बारानाला मुख्य मार्ग से लगभग 6 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच बसा हुआ है। गांव में करीब 25 परिवार निवास करते हैं। आज तक गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है, जिससे ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भवन न होने के कारण शाला में पदस्थ शिक्षकों ने अपने निजी खर्च से टिन और बल्ली लगाकर अस्थायी टप्पर बनाकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखी है।
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यह स्थिति शिक्षा विभाग की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है। जब इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किया गया तो उनका कहना है कि स्कूल भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है और निर्माण सामग्री भी भेज दी गई है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। गांव में पेयजल की भी गंभीर समस्या है। नलों में पानी नहीं आता और स्थायी जलस्रोत की व्यवस्था नहीं है। इसी वजह से कई परिवार रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में पलायन कर चुके हैं, जिनके घरों में ताले लटके हुए हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि ग्राम पंचायत से लेकर विधायक और सांसद तक आदिवासी वर्ग से होने के बावजूद यह क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। बेतूल-हरदा सांसद दुर्गा प्रसाद उइके, टिमरनी विधायक अभिजीत शाह तथा अन्य जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में आने के बाद भी ग्राम बारानाला के आदिवासी बच्चों को आज तक पक्की स्कूल इमारत और मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो सकीं। ग्रामीणों ने शीघ्र स्कूल भवन निर्माण, सड़क और पेयजल व्यवस्था की मांग की है।