मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की धार्मिक तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर के 92 नाविक खुद को लाइसेंस दिए जाने को लेकर तीन साल से लगातार नगर परिषद के चक्कर काट रहे हैं। बावजूद इसके अब तक नगर परिषद ने इन नाविकों की फरियाद पर ध्यान नहीं दिया है। हालांकि, नाविकों के अनुसार उन्हें कई बार परिषद के अधिकारी सहयोग और सहायता का आश्वासन तो देते रहते हैं। लेकिन सारे दस्तावेज जमा करने और हर तरह के टैक्स को समय पर अदा करने को तत्पर रहने के बावजूद हमें लाइसेंस नहीं देते।
पिछले तीन साल से कई बार बगैर लाइसेंस के चलते हमारी नावों को नर्मदा से बाहर कर दिया जाता है। फिर कुछ समय के लिए हम लोग वापस से नौका संचालन शुरू करते हैं और कुछ दिनों में हमें फिर से नर्मदा से दूर कर दिया जाता है। ऐसे में हम सभी 92 नविकों के परिवारों के सामने गुजर बसर और रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाता है। जबकि हम यहां के पीढ़ियों से स्थाई निवासी होकर मेहनत कर वैद्ध रूप से नाव चला कर अपना परिवार पालना चाह रहे हैं। लेकिन नगर परिषद के अधिकारी हमारे साथ दोहरा रवैया अपना रहे हैं।
नहीं मिल रहा नगर परिषद से सहयोग
इधर, इस मामले में प्रदर्शन कर रहे नाविक रोहित ने बताया कि हम लोगों को नगर परिषद पिछले तीन साल से लाइसेंस नहीं दे रही है। जबकि हमारा यही काम है और हमें ये लोग कभी भी बंद कर देते हैं, फिर कभी चालू होता है और फिर से बंद कर देते हैं। ऐसे में हमारे सामने रोजगार की परेशानी खड़ी हो जाती है। इसलिए हम लोग नगर परिषद से सबसे ज्यादा पीड़ित हैं। वहीं, नाविक संतोष वर्मा ने बताया कि प्रशासन हर बार हमको आकर आश्वासन देता है कि हम आपके कार्य में सहायता करेंगे, सहयोग करेंगे और बस वे लोग आश्वासन देकर चले जाते हैं और पिछले तीन साल से हम लोग लगातार इन लोगों को कई कागज दे चुके हैं लाइसेंस के लिए। लेकिन हमें अभी तक किसी भी प्रकार का सहयोग नगर परिषद से नहीं मिल रहा है।
ओंकार बाबा देने वाले, फिर भी नगर परिषद लगा रही प्रतिबंध
वहीं, इनके साथी नाविक दीपक ने बताया कि हम लोग नगर परिषद का जो भी टैक्स बनता है, वह सभी देकर वैद्ध रूप से लाइसेंस लेना चाहते हैं और अभी नर्मदा नदी में जितनी भी नाव खड़ी हुई हैं, उन सभी को लाइसेंस मिलना चाहिए। चाहें तो एक बार सभी को लाइसेंस देकर फिर चाहे तो अगले कई साल के लिए इस पर रोक लगा दी जाए। वहीं, नाविक धनराज ने बताया कि यह शासन की भी जिम्मेदारी है कि यहां के नागरिकों को अपनी जीविका चलाने में सहयोग प्रदान करें। यदि यहां का नागरिक यहीं अपनी जीविका नहीं चलाएगा तो कहां जाएगा और जब ओंकार बाबा देने वाले हैं तो फिर नगर परिषद के यह लोग उस पर क्यों प्रतिबंध लगा रहे हैं।
लाइसेंस की प्रक्रिया है पेंडिंग
वहीं, इस मामले में जब नगर परिषद के सीएमओ संजय गीते से बात करना चाही तो उन्होंने फोन तो रिसीव नहीं किया। हालांकि, परिषद से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार स्थानीय नाविक संघ इन 92 परिवरों का विरोध कर रहा है। इसी के चलते इनके लाइसेंस की प्रक्रिया फिलहाल पेंडिंग में है। हालांकि, बीते तीन सालों से चल रही यह प्रक्रिया और कितना समय तक चलेगी। इस पर अभी कोई भी जिम्मेदार कुछ नहीं बोल पा रहा है।