धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर में शुक्रवार सुबह मां नर्मदा के बढ़े जलस्तर के बीच दो अलग-अलग स्थानों पर डूबने की घटनाएं सामने आईं। समय रहते नाविकों, एसडीईआरएफ (SDERF) जवान और एक स्थानीय फोटोग्राफर की सतर्कता से पांच श्रद्धालुओं की जान बचा ली गई। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद घाटों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
ब्रह्मपुरी घाट पर चार युवकों का रेस्क्यू
पहली घटना सुबह करीब 9:30 बजे ब्रह्मपुरी घाट पर हुई। बिहार के भागलपुर निवासी 25 वर्षीय सुरेंद्र और अंशुराज अपने दो अन्य साथियों के साथ नर्मदा में स्नान करने उतरे थे। स्नान के दौरान चारों गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। श्रद्धालुओं की चीख-पुकार सुनकर घाट पर मौजूद नाविक संजय वर्मा ने बिना देर किए नदी में छलांग लगा दी। उनकी मदद के लिए नाविक शंभू वर्मा, दीपक वर्मा और जीतू वर्मा भी मौके पर पहुंचे। संयुक्त प्रयास से चारों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
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केवलराम घाट पर एसडीईआरएफ जवान और फोटोग्राफर बने जीवनरक्षक
कुछ देर बाद दूसरी घटना केवलराम घाट पर हुई। हरियाणा से आए श्रद्धालुओं के समूह के साथ स्नान कर रहे 30 वर्षीय रोहित चौहान (पुत्र रिंकू चौहान) अचानक गहरे पानी में डूबने लगे। मौके पर तैनात एसडीईआरएफ जवान उदय सोलंकी ने तुरंत रेस्क्यू रिंग फेंकी। इसी बीच वहां मौजूद स्थानीय फोटोग्राफर गाना मेघवाल ने भी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी। दोनों के संयुक्त प्रयास से रोहित को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
जलस्तर पांच फीट बढ़ा, चेतावनी के बावजूद नहीं मान रहे श्रद्धालु
स्थानीय प्रशासन के अनुसार इन दिनों नर्मदा नदी का जलस्तर सामान्य से करीब पांच फीट अधिक है। नगर परिषद, होमगार्ड और स्वयंसेवक लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से श्रद्धालुओं से गहरे पानी में न उतरने की अपील कर रहे हैं। इसके बावजूद कई लोग चेतावनियों को नजरअंदाज कर जोखिम उठा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में डूबने की यह तीसरी घटना है। स्थानीय लोगों ने घाटों पर बैरिकेडिंग मजबूत करने और गोताखोरों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। प्रशासन का कहना है कि चेतावनी के बावजूद लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल राहत की बात यह है कि सभी पांच श्रद्धालु सुरक्षित हैं।