मध्यप्रदेश के खंडवा में तालाब की जमीन पर वर्षों से रह रहे परिवारों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। यहां शकर तालाब की जमीन पर बने 25 मकानों को हटाने के आदेश बीते दिनों जबलपुर हाईकोर्ट ने नगर निगम को दिए थे, लेकिन उस आदेश पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त तय की है, और तब तक के लिए इन मकानों पर किसी भी तरह की बुलडोजर कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
दरअसल खंडवा शहर के बीचों-बीच स्थित शकर तालाब दशकों पुराना क्षेत्र है। स्थानीय निगम के अनुसार शहर के विस्तार के दौरान रखरखाव के अभाव में तालाब में पानी का भराव कम होता गया। नतीजा ये हुआ कि धीरे-धीरे तालाब की जमीन पर अतिक्रमण शुरू हो गया, और यहां मकान बनते चले गए। इसको लेकर पिछले साल जून 2024 में खंडवा नगर निगम ने तालाब का पुनरुद्धार और यहां पार्क विकसित करने के लिए एक बड़ा बुलडोजर अभियान चलाया था। इस दौरान तालाब की जमीन से 87 मकानों को तोड़ दिया गया था। हालांकि नगर निगम ने यहां कुल 112 मकानों को चिन्हित किया था।
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25 परिवारों के पास थे दस्तावेज, इसलिए बचे
जानकारी के अनुसार इन 112 में से करीब 25 मकान ऐसे थे जिनके पास शासकीय दस्तावेज और न्यायालय का स्टे आदेश मौजूद था। दस्तावेज होने की वजह से नगर निगम इन पर उस समय कार्रवाई नहीं कर पाया था। लेकिन हाल ही में जबलपुर हाईकोर्ट ने इन 25 मकानों को भी हटाने के आदेश दे दिए थे। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद इन परिवारों पर फिर से बुलडोजर का खतरा मंडराने लगा था।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची APCR, मिल गई राहत
हाईकोर्ट के आदेश को लीगल और सामाजिक संस्था Association for Protection of Civil Rights - APCR ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। APCR की दलील थी कि, इन 25 परिवारों के पास वैध दस्तावेज हैं, और वर्षों से ये लोग यहां रह रहे हैं। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर तत्काल रोक लगा दी। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक किसी भी मकान को नहीं तोड़ा जाएगा।
सबके अपने अपने तर्क, अब आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली तारीख 3 अगस्त तय की है। तब तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। यानी नगर निगम 3 अगस्त तक इन 25 मकानों पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकेगा। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और उनके पास बिजली, पानी जैसे सरकारी कनेक्शन भी हैं। हालांकि नगर निगम का तर्क है कि तालाब की जमीन सरकारी है और उसे अतिक्रमण मुक्त कराकर जनहित में तालाब और पार्क विकसित किया जाना जरूरी है।