जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज नाव के डूबने से प्रदेशभर में नाव संचालन और क्रूज संचालन समेत एडवेंचर की गतिविधियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, नर्मदापुरम के सिवनी मालवा में नर्मदा नदी के बाबरी घाट पर प्रशासनिक लापरवाही ने खतरनाक रूप ले लिया है।
नाव संचालक पैसे के लालच में क्षमता से कई गुना ज्यादा यात्रियों को बैठा रहे हैं, और नियमों को दरकिनार करते हुए ट्रैक्टर, कार और बाइक जैसे भारी वाहनों को भी नावों में लादकर नदी पार करा रहे हैं। यह नजारा किसी भी बड़े हादसे की चेतावनी जैसा है, लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।
स्थिति और भी डरावनी तब हो जाती है जब सुरक्षा इंतजामों की हकीकत सामने आती है। बाबरी घाट पर न तो लाइफ जैकेट उपलब्ध हैं, न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए गोताखोर मौजूद हैं, और न ही किसी तरह की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था दिखाई देती है। रोजाना सैकड़ों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता ने सब कुछ अनसुना कर दिया। सवाल यह है कि क्या सिस्टम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
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घाट का रास्ता बंद करवा दिया गया
जनपद पंचायत सीईओ श्रुति चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि ठेका सिवनी मालवा से संचालित हो रहा है और जबलपुर हादसे के बाद सख्त निर्देश जारी किए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में जरूर आया। नर्मदापुरम कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने देर रात अधिकारियों को मौके पर भेजा व सुरक्षा के मद्देनजर जेसीबी मशीन से घाट का रास्ता खुदवाकर बंद करा दिया गया।