नर्मदापुरम संभाग में शनिवार को मौसम ने अचानक करवट लेते हुए तबाही का मंजर पैदा कर दिया। तेज आंधी, जोरदार बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों से लेकर घरों तक भारी नुकसान पहुंचाया। कई इलाकों में तेज हवाओं के चलते पेड़ जड़ से उखड़कर गिर गए, जबकि कच्चे और टीन शेड वाले घरों की छतें उड़ गईं।
किसानों के लिए यह बदलाव किसी आपदा से कम नहीं रहा, क्योंकि तैयार खड़ी फसलें देखते ही देखते बर्बाद हो गईं। खासकर बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र में करीब आधे घंटे तक लगातार ओले गिरते रहे, जिससे खेतों में बर्फ जैसी सफेद परत जम गई और लगभग 50 प्रतिशत फसल खराब हो गई।
वहीं, नर्मदापुरम जिले के बनखेड़ी, सेमरीहरचंद और तवानगर जैसे इलाकों में भी ओलावृष्टि का असर बेहद गंभीर रहा। यहां करीब 20 मिनट तक ओले गिरने के साथ लगभग 50 मिनट तक तेज बारिश दर्ज की गई। नर्मदापुरम शहर में भी सुबह छह से सात बजे के बीच हल्की बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट महसूस की गई और मौसम ठंडा हो गया।
अचानक बदले इस मौसम ने आम जनजीवन को भी प्रभावित किया, जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं और बारिश ने दैनिक गतिविधियों में बाधा डाली।
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मौसम विभाग के अनुसार, इस बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता प्रमुख कारण है। वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ मध्य पाकिस्तान के ऊपर समुद्र तल से 3.1 से 9.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर सक्रिय है, जिसके साथ चक्रवातीय परिसंचरण और पश्चिमी जेट स्ट्रीम ने वातावरण में नमी बढ़ा दी है। यही वजह है कि प्रदेश के कई हिस्सों में अचानक मौसम खराब हुआ और तेज आंधी-बारिश के साथ ओलावृष्टि देखने को मिली।
हालांकि, फिलहाल राहत के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सात अप्रैल से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में फिर से तेज हवाएं, बारिश और ओले गिरने की संभावना बनी हुई है। प्रशासन और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि मौसम का यह अस्थिर रुख आगे भी नुकसान पहुंचा सकता है।