मध्यप्रदेश के नीमच और मंदसौर जिलों में रविवार को हुई ओलावृष्टि और बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। सबसे अधिक नुकसान पालसोड़ा क्षेत्र के भंवरासा सहित आसपास के इलाकों में हुआ है। अफीम, सरसों, चना और गेहूं की फसलों को भारी क्षति पहुंची है।
सोमवार को मुआवजे और अतिशीघ्र सर्वे की मांग को लेकर किसानों ने महू–नीमच हाईवे पर भंवरासा फंटे पर चक्काजाम किया। सुबह करीब 11 बजे सैकड़ों किसान हाईवे पर बैठ गए, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। चक्काजाम की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवलसिंह सिसौदिया, नीमच कैंट थाना प्रभारी निलेश अवस्थी और नीमच सिटी थाना प्रभारी पुष्पा चौहान दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे।
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जाम से पांच किमी लंबी लगी वाहनों की कतार
करीब डेढ़ घंटे तक चले चक्काजाम के दौरान हाईवे पर दोनों ओर पांच-पांच किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शन स्थल पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती, दिग्विजयसिंह आमलीखेड़ा और जिला पंचायत अध्यक्ष सज्जनसिंह चौहान भी पहुंचे। अधिकारियों द्वारा एक सप्ताह के भीतर फसल नुकसान का सर्वे कर रिपोर्ट शासन को भेजने का आश्वासन दिए जाने के बाद किसान दोपहर करीब 12:30 बजे धरने से उठे। नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने तहसीलदारों और पटवारियों को तत्काल सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद पुलिस ने जाम खुलवाकर यातायात सुचारु कराया, हालांकि करीब एक घंटे तक हाईवे पर अव्यवस्था बनी रही।
जिला पंचायत अध्यक्ष को किसानों ने सुनाई खरी-खरी
धरना स्थल पर पहुंचे भाजपा से जुड़े जिला पंचायत अध्यक्ष सज्जनसिंह चौहान को किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। किसानों ने कहा कि वे क्षेत्र के जनप्रतिनिधि हैं और इस आपदा के समय उन्हें कृषि मंत्री या मुख्यमंत्री से मुआवजे को लेकर बात करनी चाहिए थी। इस पर सज्जनसिंह चौहान असहज नजर आए। कुछ देर बाद किसानों को समझाइश दी गई, जिसके बाद स्थिति शांत हुई।