रायसेन नगर पालिका परिषद द्वारा संपत्ति कर वसूली के लिए शुरू किया गया ‘ढोल बजाओ’ अभियान अब विवादों में घिर गया है। प्रशासन का दावा है कि शहर में करीब 5 करोड़ रुपये का संपत्ति कर बकाया है। इसकी वसूली के लिए 450 बड़े बकायादारों के घरों और प्रतिष्ठानों के बाहर ढोल बजाकर उन्हें जागरूक किया जा रहा है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद कई व्यापारियों ने नगर पालिका पर ही लाखों रुपये की देनदारी लंबित रखने का आरोप लगाया है।
मंगलवार को प्रशिक्षु भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी कुलदीप पटेल और मुख्य नगरपालिका अधिकारी सुरेखा जाटव ने राजस्व अमले के साथ शहर के व्यावसायिक क्षेत्रों में अभियान चलाया। इस दौरान कई दुकानों और प्रतिष्ठानों पर बकाया संपत्ति कर के नोटिस चस्पा किए गए। सज्जाद हुसैन पेट्रोल पंप पर 2 लाख 98 हजार रुपये के बकाया का नोटिस लगाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ गया।
पेट्रोल पंप संचालक परवेज खान ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वर्ष 2021 से उनके पंप का करीब 3 लाख 90 हजार रुपये का भुगतान लंबित है। उनका कहना है कि कई बार आवेदन और अनुरोध करने के बावजूद राशि का भुगतान नहीं किया गया, जबकि अब सार्वजनिक रूप से नोटिस चस्पा कर उन्हें अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि पहले विभाग अपनी देनदारी चुकाए या बकाया राशि को संपत्ति कर में समायोजित किया जाए।
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इसी प्रकार अन्य व्यापारियों ने भी अभियान के तरीके पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वसूली के नाम पर ढोल बजाकर सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना उचित नहीं है। व्यापारियों का आरोप है कि नगर पालिका एकतरफा कार्रवाई कर रही है और अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों की अनदेखी कर रही है।
वहीं नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि शहर के विकास कार्यों के लिए राजस्व बढ़ाना आवश्यक है और लंबे समय से लंबित संपत्ति कर की वसूली के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं, बल्कि करदाताओं को जागरूक करना है, ताकि नगर विकास के कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
इस विवाद के बाद शहर में यह बहस तेज हो गई है कि जिन पर स्वयं देनदारी लंबित रखने के आरोप हैं, क्या उन्हें बकायादारों के दरवाजे पर ढोल बजाने का नैतिक अधिकार है।