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Know, finally! Why is the beauty of the market on Diwali festival fading_GROUND REPORT
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Rajgarh Ground Report: क्यों फीकी पड़ती जा रही दीपावली पर लगने वाले बाजारों की रौनक? व्यापारियों ने बताई वजह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़ Published by: राजगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 28 Oct 2024 06:45 PM IST
दीपावली पर्व की तैयारियों के लिए राजगढ़ शहर में लगने वाले बाजार सजकर तैयार हैं, लेकिन दुकानदारों को खरीदारों का इंतजार है। साल के सबसे बड़े इस त्योहार से हर वर्ग के व्यापारी को अच्छे मुनाफे की उम्मीद होती है। इसी आस के साथ व्यापारी बाजार में उतरते हैं और अपने प्रतिष्ठानों को सजाकर बैठ जाते हैं। लेकिन, बीते कुछ वर्षों से दीपावली के बाजारों की रौनक फीकी पड़ती नजर आ रही है। इसका कारण जानने के लिए अमर उजाला की टीम ग्राउंड पर पहुंची और दुकानदारों से बाजार का हाल और उनकी परेशानियों का सबब जाना।
सबसे पहले हमने शहर के मुख्य बाजार का रुख किया, जहां दीपावली के पहले से ही घरेलू साज-सज्जा की दुकानें सजकर तैयार हो जाती हैं। उन्हीं में से एक दुकान के व्यापारी कमलेश साहू बताते हैं कि इस बार धंधा मंदा है, अभी थोड़ा समय लगेगा, लेकिन उसके बाद ठीक चलने की उम्मीद है। कमलेश बताते हैं कि उनकी दुकान से खरीदारी शहरी क्षेत्र के लोगों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के लोग ज्यादा करते हैं। क्योंकि, शहरी लोग ऑनलाइन बाजार और शॉपिंग को ज्यादा महत्व देते हैं। वहीं, उनके पड़ोस में दुकान लगाने वाले दिलीप सिंह सोलंकी का कहना है कि वह लगभग 25 साल से दीपावली पर्व पर लगने वाले बाजार में दुकान संचालित कर रहे हैं और घरों की साज-सज्जा का सामान लेकर आते हैं। लेकिन, पिछले दो वर्षों से ऑनलाइन बाजार ने पूरे व्यापार की हालत खराब कर दी है। युवा वर्ग ऑनलाइन शॉपिंग में ज्यादा विश्वास करता है, जबकि जो वस्तु ऑनलाइन महंगी बिकती है, उसे हम सस्ते दामों पर बेचते हैं। लेकिन, दिखावे के चक्कर में युवा ऑनलाइन का रुख कर रहा है।
इनके अलावा राजगढ़ शहर के नाका नंबर 3 पर इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान संचालित करने वाले गजेंद्र मौर्य की चिंताएं भी कम नहीं हैं। वे कहते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष बाजार में खरीदारी करने वालों की भीड़ आधी नजर आ रही है। इसका कारण भी ऑनलाइन बाजार ही है, जिसके बारे में सरकार को विचार करना चाहिए, क्योंकि इससे छोटे व्यापारी कई तरह के नुकसान भुगत रहे हैं और उनका व्यापार चौपट होता जा रहा है। इन दुकानदारों से बात करने के बाद हम मिट्टी के दिए और बर्तन बनाने वाले प्रजापति समाज के उन कारीगरों के पास पहुंचे, जो बड़ी मेहनत और मशक्कत के बाद मिट्टी से बने दिए और बर्तनों को अंतिम रूप देते हैं। अमर उजाला से बात करते हुए चंदा बाई बताती हैं कि दीपावली पर्व के लिए दिए बनाने की तैयारियों में वे नवरात्रि के पहले से ही जुट जाती हैं और करीब दस हजार दिए बनाकर तैयार कर लेती हैं, जिनमें से कुछ बच भी जाते हैं।
गौरतलब है कि त्योहारों को अपना सीजन मानकर जमा पूंजी को व्यापार में इन्वेस्ट करने वाले व्यापारियों के माथे पर ऑनलाइन बाजार ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि व्यापारियों में यह भय भी है कि कंपटीशन के इस दौर में कहीं उन्हें मुनाफा कमाने की बजाय अपना सामान औने-पौने दामों में न बेचना पड़े।
राजगढ़ से कैमरामैन लखन गुर्जर के साथ अब्दुल वसीम अंसारी की रिपोर्ट
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