रतलाम जिले में होली व धुलेंडी पर्व उत्साह व उल्लास से मनाया गया। धुलेंडी पर्व पर शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से धूम रही और बच्चों, युवाओं व महिलाओं की टोलियां एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर त्योहार की शुभकामनाएं देते रहे। अलकापुरी चौराहे पर आयोजित होली मिलन समारोह में महापौर प्रहलाद पटेल ने भी साथियों व नागरिकों के साथ जमकर होली खेली। इस दौरान महापौर ने मंच पर युवाओं के साथ लैला ओ लैला…गाने पर जमकर डांस किया। महापौर संगीत प्रेमी हैं और अक्सर कार्यक्रमों में गाने भी गाते रहते हैं। उधर, अमृत सागर कॉलोनी में पानी मिली मिट्टी से प्राकृतिक तरीके से होली खेलने का आयोजन किया गया।
जिले में सोमवार की रात अनेक स्थानों पर होली का दहन किया गया और देर रात तक लोग लंग-गुलाल से होली खेलते नजर आए। दूसरे दिन धुलेंडी पर्व पर चंद्र ग्रहण होने से धुलेंडी का पर्व नहीं मनाया गया और अधिकांश लोगों ने होली नहीं खेली। बुधवार को जिले में धुलेंडी पर्व उत्साह से मनाया गया। सुबह से लोग घरों से बाहर निकलकर एक-दूसरे को रंगते और पर्व की शुभकामनाएं देते नजर आए। बाजारों, सार्वजनिक स्थलों सहित हर क्षेत्र में शाम तक धुलेंडी की धूम रही और लोग रंगों से सराबोर नजर आए। रतलाम शहर की अमृत सागर कॉलोनी में इस साल अनोखे अंदाज में होली मनाई गई। क्षेत्र में नागरिकों ने 15 बाय 30 फीट का बड़ा गड्ढा तैयार किया। गड्ढे में जैविक मिट्टी व पानी मिलाकर प्राकृतिक तरीके से होली का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में लोग गड्ढे में उतरे और होली के गीतों के साथ डांस करते हुए मिट्टी मिला पानी एक-दूसरे पर फैंककर होली खेलते रहे। जिले के नामली, सैलाना, आलोट, बड़ावदा, नगरों सहित गांवों में भी उत्साह से होली का पर्व मनाया गया। पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। रतलाम शहर, जावरा, आलोट, ताल, बडावदा, आलोट, नामली सहित विभिन्न नगरों व कस्बों के प्रमुख चौराहों व संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा तथा पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारी वाहनों से भ्रमण कर स्थिति पर नजर रखते रहे।
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पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई
इस वर्ष होली पर्व पर मध्य प्रदेश शासन के स्वच्छ और स्वस्थ होली अभियान के तहत देशी गाय के गोबर से बन कंडों व गो-काष्ठ का उपयोग कर सात्विक होलिका का पूजन व दहन किया गया। इस जिले में इस तरह का यह पहला आयोजन था। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. लीला जोशी ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा और गो-सेवा के साथ त्योहार मनाना ही वास्तविक सात्विक उत्सव है। प्रमोद गुगालिया ने कहा कि त्योहार केवल खुशियों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि अपनी प्रकृति और जड़ों से जुड़ने का माध्यम है। गो-काष्ठ का उपयोग न केवल प्रदूषण को कम करेगा बल्कि हमारी गो शालाओं के स्वावलंबन व ग्रीन रतलाम के संकल्प को भी मजबूती देगा। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रांतीय उपाध्यक्ष अनुराग लोखंडे ने पर्यावरण सरंक्षण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गो-काष्ठ का उपयोग वैज्ञानिक दृष्टिकोण की वायुमंडल को शुद्ध करता है।