शहडोल जिले के अंतिम छोर पर स्थित वन परिक्षेत्र ब्यौहारी की ग्राम पंचायत महादेवा और खारी में बीती रात एक जंगली हाथी ने ऐसा कहर बरपाया कि कई गरीब परिवारों के आशियाने उजड़ गए। हाथी ने कई कच्चे घरों को तहस-नहस कर दिया और घरों में रखा अनाज और खेतों की फसलें भी बर्बाद कर दीं। हमले के दौरान ग्रामीणों को घर छोड़कर भागना पड़ा, जिससे कई लोग बेघर और भयभीत हो गए हैं।
हाथियों का आतंक ने उड़ाई ग्रामीणों की नींद
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि बीते कई महीनों से हाथियों का आतंक लगातार बना हुआ है। दर्जनों घर अब तक इनके हमलों का शिकार हो चुके हैं। खेतों में खड़ी फसलें रौंद दी गई हैं और ग्रामीणों की रातें जागते हुए बीत रही हैं। गांवों में अब मशाल जलाकर रात भर पहरा देने की नौबत आ गई है। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक पूरा समुदाय भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहा है।
यह भी पढ़ें- Shivpuri News: सिंध नदी किनारे मिला निजी बैंक मैनेजर का शव, चार दिन से थे लापता; मौत से परिजनों में मचा कोहराम
वन विभाग की टीमें तैनात, पर स्थायी समाधान नहीं
वन विभाग की ओर से हाथी की निगरानी के लिए विशेष टीमों की तैनाती की गई है। नुकसान का पंचनामा बनाकर मुआवजा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। वन विभाग के रेंजर अशोक निगम ने बताया कि महादेवा और खारी क्षेत्र बीटीआर (बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व) से जुड़ा इलाका है और यह हाथियों की पारंपरिक विचरण दिशा (कॉरिडोर) में आता है। इसलिए हाथियों को पूरी तरह से रोकना चुनौतीपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि देवलौंद के शहरगढ़ जंगल में फिलहाल दो दर्जन से अधिक हाथी मौजूद हैं, जो बीते कई महीनों से इस इलाके में विचरण कर रहे हैं। बीती रात इन हाथियों में से एक हाथी महादेवा पहुंचा और उसने कई घरों में तोड़फोड़ कर उत्पात मचाया।
महादेवा की सरपंच राधा कोल ने कहा कि गांव के लोग बेहद परेशान हैं। हर रात डर का माहौल बना रहता है कि कहीं हाथी फिर से न लौट आए। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों से बचाव हो सके।
यह भी पढ़ें- Damoh News: पत्नी मायके गई तो पति ने काटा प्राइवेट पार्ट, गंभीर हालत में अस्पताल में चल रहा इलाज, जानें मामला
प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
राजस्व और प्रशासनिक अमला फिलहाल सर्वे और मुआवजा वितरण के आश्वासन दे रहा है, लेकिन ग्रामीणों की पीड़ा कहीं अधिक गहरी है। उनका कहना है कि केवल मुआवजा देना पर्याप्त नहीं, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि हाथी गांवों तक पहुंचे ही नहीं। जब तक हाथियों के कॉरिडोर से लगे गांवों में सुरक्षा उपायों को मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक यह संकट बना रहेगा।